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आठवां ‘ग्लोबल फेस्टिवल आफ जर्नलिज्म’ सम्पन्न

(सी एम पपनैं )नोएडा,  पत्रकारिता के माध्यम से प्रेम, शांति और एकता की भावनाओ को सफल बनाने के उद्देश्य से नोएडा फिल्म सिटी, सैक्टर 16-ए स्थित सु-प्रसिद्ध मारवाह स्टूडियो काम्प्लेक्स मे इंटरनैशनल जर्नलिज्म सेंटर द्वारा आठवां “ग्लोबल फेस्टिवल आफ जर्नलिज्म” का भव्य आयोजन 12 से 14 फरवरी तक डॉ संदीप मारवाह फेस्टिवल प्रेसीडेंट एंड चांसलर एएएफटी यूनिवर्सिटी आफ मीडिया एंड आर्ट की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

 

आयोजित महोत्सव मे पत्रकारिता जगत से जुडी गतिविधियो मे संगोष्ठी, डाक्यूमेंट्री मेकिंग वर्कशाप, पुस्तक विमोचन, फिल्म स्क्रीनिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।

महोत्सव में देश-विदेश के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ पत्रकारों की बड़ी संख्या मे भागीदारी रही। मीडिया जगत से जुड़े आमंत्रित जाने माने अतिथि वक्ता छात्र-छात्राओं से रूबरू हुए, उन्हे निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता से अवगत कराया।

 

14 फरवरी महोत्सव समापन संगोष्ठी मे ‘हिंदी अखबारों में पत्रकारिता, संघर्ष और चुनौतियां’ विषय पर पत्रकारिता के छात्र-छात्राओं से खचाखच भरे स्टूडियो मे डॉ संदीप मारवाह की अध्यक्षता तथा भारत मे अर्मीनिया राजदूत ही आर्म्स मार्टीरोषयान मुख्य अतिथि के सानिध्य में दीप प्रज्वलन तथा प्रथम पूज्य गणेश को माल्यार्पण की रश्म अदायगी के साथ प्रो.अल्बीना अब्बास एसोसिएट डायरेक्टर एसओजेएमसी द्वारा विशिष्ठ अतिथि वक्ताओ दाताराम चमोली वरिष्ठ पत्रकार, सिभिनरा कुमार वरिष्ठ पत्रकार, संतोष कुमार ‘सरस’ प्रबंध संपादक पीसमेकर,  विपिन गौड महासचिव एनएआई, सीमा गंभीर जी टीवी फेम-डिली डारलिंग्स, सी एम पपनैं राष्ट्रीय महासचिव एन एफ एन ई को मंचसीन कर संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। अतिथि वक्ताओ द्वारा पत्रकारिता से जुड़े छात्र-छात्राओं को संबोधित किया गया।

 

हिंदी अखबारों मे पत्रकारिता, चुनोतिया और संघर्ष विषय पर विशिष्ठ अतिथि वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया, समाचार पत्र जनता की सबसे नजदीकी अदालते हैं। अंग्रेजी शासनकाल में पत्रकारिता नकारात्मक थी। सकारात्मक पत्रकारिता की दरकार थी।

हिंदी पत्रकारिता आजादी के आंदोलन से प्रभावित रही व विकसित हुई। वक्ताओ ने व्यक्त किया, वर्तमान मे टीआरपी का खेल चल रहा है। अधिकतर मीडिया घराने पत्रकारिता को व्यवसाय बना चुके हैं।

वक्ताओ ने व्यक्त किया, सफलता के लिए संयम चाहिए। पत्रकारों को जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्ध होकर कार्य निर्वाह करना चाहिए। वर्तमान मे पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं। माफियाओ का बोलबाला है। पत्रकारिता की विश्वसनीयता डगमगाने लगी है। संगठन बहुत हैं, परंतु पत्रकारों मे एकता का अभाव है।

पत्रकार संगठनों के आंदोलन समाप्ति पर हैं। पत्रकारों के साथ हादसा होने पर निराशा हाथ लग रही है। पत्रकारों की सुरक्षा जरूरी है। हिंदी अखबारों से जुड़े पत्रकारो को संतोषजनक पारिश्रमिक नही मिल रहा है।

 

वक्ताओ ने व्यक्त किया, पत्रकारिता कैरियर है। जो सही है, वही सही है, यही पत्रकारिता है। पत्रकार को प्रतिदिन नया जीवन जीने का मौका मिलता है। पत्रकारिता के छात्र पत्रकारिता के महत्व व प्रैस के कायदे कानूनों को भली भांति जाने व समझे। घटना की प्रत्यक्ष तहकीकात कर सच को उजागर करे।

 

पत्रकार के एक-एक शब्द का महत्व है। गलत छपने पर किसी का भी भविष्य बर्बाद हो सकता है। फेक खबरों के प्रचार-प्रसार से आत्म हत्याए तक हुई हैं। पत्रकार की चार लाइने समाज का उद्धार कर सकती हैं, यह नोबल जॉब है। बाजारवाद और पत्रकारिता के अंतर्संबंधों ने पत्रकारिता की विषय वस्तु तथा प्रस्तुति शैली मे व्यापक परिवर्तन किया है। संपादक नामक संस्था समाप्त हो रही है।

 

वक्ताओ द्वारा ग्रामीण पत्रकारिता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। ग्रामीण पत्रकारिता के उत्थान हेतु वर्कशाप आयोजित करने पर बल दिया गया। व्यक्त किया गया, पत्रकार को अपनी खुली सोच का प्रयोग करना चाहिए, साथ ही अपनी बात जनता के सामने निष्पक्ष होकर रखनी चाहिए। वक्ताओ ने अपने काम की ओर एकाग्रचित होकर आगे बढ़ने की बात कही। व्यक्त किया, चुनोतियों को पार करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। भारतेंदु, महावीर प्रसाद द्विवेदी, रामनाथ गोयंका, अरुण शौरी, अश्वनी सरीन, आलोक तोमर इत्यादि की निर्भिक तथा प्रभाष जोशी की ईमानदारी भरी पत्रकारिता का वक्ताओ ने बखान कर उसे प्रेरणादायी कहा। पत्रकारिता के छात्रों को निर्भीक व सत्यनिष्ठ होकर पत्रकारिता मे कदम बढ़ाने का आह्वान किया गया।

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