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दून के रूटों पर चलने वाले ई-रिक्शा की होगी नंबरिंग

देहरादून,दून शहर में आने वाले दिनों में ई-रिक्शा को नंबर  आवंटित करने पर विचार किया जा रहा है। ताकि निर्धारित रूटों पर चलने वाले ई-रिक्शा की पहचान हो सके।

मगर इससे पहले सबसे बड़ी अड़चन हाल में ही निर्धारित किए गए 31 रूटों के पालन कराने की है। क्योंकि ई-रिक्शा चालक इन रूटों को मानने को तैयार ही नहीं हैं। ऐसे में शहर के मख्य मार्गों को ई-रिक्शा से मुक्त करने की सरकार की मंशा पूरी होने में बड़ी बाधा खड़ी हो गई है।

गौरतलब है कि शहर में सार्वजनिक परिवहन सेवा के अहम अंग सिटी और विक्रम के चलने के लिए भी रूट निर्धारित हैं।

इन रूटों से इतर चलने पर उन पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही दोनों को हर रूट के लिए अलग-अलग नम्बर भी आवंटित किए गए हैं। इससे सिटी बस और विक्रम सुचारु रूप से चलते हैं।

 

यह व्यवस्था देहरादून समेत अन्य शहरों में भी लागू है। अब ई-रिक्शा भी सार्वजनिक परिवहन की अहम जरूरत बनने लगे हैं। इसलिए यातायात निदेशालय और परिवहन विभाग इन्हें सुनियोजित तरीके से चलाने की कोशिशों में लग गया है, ताकि यह अपने रूटों पर चलें।

इससे उन क्षेत्रों के लोगों को भी सहूलियत मिलेगी, जहां अभी ई-रिक्शा नहीं चलते हैं। मगर समस्या इस बात की है कि इसके लिए पहले ई-रिक्शा के रूट निर्धारित करने होंगे, नबरिंग सिस्टम भी तभी प्रभावी होगा।

यह है पूरा मामला

विगत दो-तीन वर्षों के दौरान शहर में ई-रिक्शा की बाढ़ सी आ गई। शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गली-कूचों तक में इनकी पहुंच हो जाने से धीरे-धीरे यह शहर की यातायात व्यवस्था के लिए नासूर बनने लगे। लिहाजा सरकार को इन्हें सुनियोजित करने के बारे में सोचना पड़ा।

 

साल 2019 के शुरुआत में शासन ने देहरादून पुलिस से ई-रिक्शा को लेकर रिपोर्ट मांगी। इस रिपोर्ट के मिलने के बाद सरकार ने शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर घंटाघर क्षेत्र में ई-रिक्शा को प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद भी ई-रिक्शा पहले की ही तरह फर्राटा भरते रहे।

पुलिस ने सख्ती बरतने की कोशिश की तो आंदोलन करने लगे। हाल ही में ई-रिक्शा चालकों ने सचिवालय कूच कर प्रमुख मार्गों पर चलने की अनुमति मांगी, जिस पर शासन ने यातायात निदेशालय और परिवहन विभाग को ई-रिक्शा का रूट निर्धारित करने का निर्देश दिया।

 

इस पर बीती एक फरवरी को ई-रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर 31 रूट निर्धारित कर दिए गए। कहा गया कि इन रूटों पर एक सप्ताह के ट्रायल के बाद उन्हें एक-दो प्रमुख मार्गों पर लोगों की सुविधा का ख्याल रखते हुए अनुमति दी जा सकती है। मगर ई-रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों ने रूटों की इस व्यवस्था को मानने से इन्कार कर दिया और आंदोलन जारी रखा।

पहले रूटों पर करें ट्रायल, फिर हल होंगी समस्या

 

यातायात निदेशक केवल खुराना के अनुसार, ई-रिक्शा चालकों की सुविधा का ख्याल करते हुए ही रूट निर्धारित किए गए हैं। बैठक में यूनियन के पदाधिकारियों ने सहमति भी जताई थी, लेकिन बाद में इसे मानने से मुकर गए। पहले वह रूटों पर ट्रायल करें, इसमें आने वाली समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

 

रूट निर्धारण से नहीं आती समस्या

एआरटीओ पर्वतन अरविंद पांडेय के अनुसार, सिटी बस और विक्रम के भी रूट निर्धारित हैं। वह पूरी सहूलियत के साथ उसका पालन करते हैं, कहीं कोई समस्या नहीं आती। इसी को देखते हुए ई-रिक्शा के भी रूट निर्धारित किए गए हैं। पहले वह इस पर ट्रायल करें। ट्रायल में जो दिक्कतें सामने आएंगी, उन्हें दूर किया जाएगा।

विरोध स्वरूप भीख मांगेंगे ई-रिक्शा चालक

 

शहर में मुख्य मार्गों पर ई-रिक्शा को प्रतिबंधित किए जाने के विरोध में आंदोलनरत देवभूमि ई-रिक्शा ओनर एंड ड्राइवर वेलफेयर सोसायटी का धरना और अनशन जारी है। अब आंदोलन के तहत रिक्शा चालक सरकार के विरोध में शहर में भीख मांगेंगे।

मांगों को लेकर पिछले 15 दिन से रिक्शा चालकों का आंदोलन जारी है। इसके तहत रिक्शा चालक व मालिक परेड ग्राउंड स्थित धरनास्थल पर धरना और अनशन कर रहे हैं। शासन-प्रशासन के किसी प्रतिनिधि के न पहुंचने से रिक्शा चालकों में आक्रोश है।

ऐसे में रिक्शा चालकों ने शहर में भीख मांगकर सरकार का विरोध करने का एलान किया है। इस दौरान विशाल, राजकुमार, सोनेलाल, ललित शर्मा अनशन पर बैठे रहे। साथ ही रवींद्र त्यागी, भुवनेश्वर चंद्रा, रोहित कुमार, संतोष कुमार, विजय कुमार, गुलिस्तां अंसारी, रोबिन त्यागी, सुरेश शर्मा आदि धरने पर बैठे।

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