उम्मीदें

काशीपुर का द्रोणसागर सरोवर अब 5 करोड़ के बजट से पुनर्जीवित होगा

काशीपुर: पौराणिक पहचान रखने वाला काशीपुर का द्रोणसागर अब वर्षभर पानी से लबालब भरा रहेगा। इतना ही नहीं इसे पर्यटन गतिविधियों के लिए विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से द्रोणसागर के पुनर्जीवन और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के लिए करीब पांच करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिसे शासन से स्वीकृति मिल गयी है। प्लान के मुताबिक द्रोणसागर को पुनर्जीवित करने, गेट निर्माण, फूड कोर्ट, ओपन एयर थियेटर, पार्किंग व पार्क समेत अन्य कार्य किए जाने हैं।

काशीपुर स्थित द्रोणसागर पौराणिक इतिहास समेटे हुए है। करीब एक किमी व्यास में फैले इस सरोवर के साथ कई पौराणिक तथ्य जुड़े हुए हैं। मान्यता है कि गुरु द्रोणाचार्य अपने शिष्यों के साथ यहां रहा करते थे और इसी सरोवर में स्नान करते थे। पौराणिक महत्व होने के बावजूद देखरेख के अभाव में सरोवर की स्थिति दयनीय हो गयी है। अब कुमाऊं मंडल विकास निगम ने सरोवर के पुनरोद्धार और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के लिए कवायद शुरू की है।

केएमवीएन के एमडी नरेंद्र भंडारी ने बताया कि सरोवर में वर्षभर पानी बना रहे उसके साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकें इसे लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। जिसमें विभिन्न कार्यों के लिए पहले चरण में पांच करोड़ के प्रोजेक्ट को शासन की स्वीकृति मिल गयी है। जल्द बजट जारी होते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 

67 लाख की लागत से लबालब होगा सरोवर

केएमवीएन एमडी नरेंद्र भंडारी ने बताया कि द्रोणसागर में वर्षभर पानी नहीं रहता। सरोवर में वर्षभर पानी बना रहे इस बात को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट बनाया गया है। बताया कि सरोवर तक पानी लाने के लिए 67 लाख का प्रस्ताव सिंचाई विभाग को भेजा है। सिंचाई विभाग द्वारा क्षेत्र में स्थित पुरानी नहर से सरोवर तक पानी पहुंचाया जाएगा। सरोवर का पानी ताजा बना रहे इसके लिए पानी की निकासी के भी इंतजाम किये जाएंगे। 

सुविधाओं से बढ़ेगा पर्यटन

केएमवीएन एमडी ने बताया कि सरोवर के पुनरोद्धार के साथ ही यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ सकें इसका प्रयास किया जा रहा है। जिसके लिए सरोवर के मुख्य गेट को भव्य रूप दिया जाना है। साथ ही सरोवर के चारों ओर पाथवे, ओपन एयर जिम, ओपन एयर थियेटर, चिल्ड्रन पार्क, फूड कोर्ट, 40 वाहनों की पार्किंग समेत अन्य विकासात्मक कार्य किये जाने हैं।

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