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डॉ अल्का मित्तल बनी ONGC कंपनी की चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर

ऑइल एंड नेचुरल गैस कंपनी (ONGC) भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक है. और अब इतिहास में पहली बार एक महिला इस कंपनी की कमान संभालने जा रही है. 3 जनवरी को कंपनी ने आधिकारिक घोषणा की कि डॉ अल्का मित्तल कंपनी की चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) का पद संभालेंगी.

डॉ. अल्का मित्तल कंपनी की सबसे सीनियर डायरेक्टर (एचआर) हैं और अब उन्हें सीएमडी का अतिरकित प्रभार दिया गया है. अगले छह महीने तक या जब तक इस पद के लिए नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती है तब तक डॉ अल्का ही इस पद को संभालेंगी.

मार्च 2021 के बाद से नहीं था कोई फूल-टाइम सीएमडी: 

आपको बता दें कि मार्च 2021 में कंपनी के तत्कालीन सीएमडी शशि शंकर के रिटायर होने के बाद कंपनी को कोई फूल-टाइम सीएमडी नहीं मिला है. हालांकि उनकी रिटायरमेंट के बाद कंपनी ने पोस्ट निकाली थीं और कुछ लोगों का इंटरव्यू भी हुआ. लेकिन किसी भी प्रतिभागी का चयन नहीं हुआ. 

शंकर के बाद उस समय कंपनी के सबसे सीनियर डायरेक्टर को सीएमडी का पद दिया गया. इस तरह से कुछ समय तक सुभाष कुमार, पूर्व डायरेक्टर (फाइनेंस) कंपनी के सीएमडी रहे. लेकिन दिसंबर 2020 के अंत में सुभाष भी रिटायर हो गए. 

पहली बार महिला बनी सीएमडी: 

सुभाष कुमार की रिटायरमेंट के बाद डॉ अल्का मित्तल का सीएमडी बनना लगभग तय था. क्योंकि उनके बाद कंपनी में वही सबसे सीनियर डायरेक्टर हैं. लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा तीन जनवरी को की गई. 

सीएमडी बनकर इतिहास रचने वाली डॉ अल्का साल 1985 से ONGC में काम कर रही हैं. उन्होंने इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की हुई है. साथ ही, वह एमबीए (HRM) और कॉमर्स व बिज़नेस स्टडीज में डॉक्ट्रेट हैं. उन्होंने साल 1985 में कंपनी में बतौर ग्रेजुएट ट्रेनी अपनी शुरुआत की थी. 

हालांकि उन्हें एचआर डायरेक्टर के पद पर साल 2018 में नियुक्त किया गया था. कंपनी के इतिहास में यह पहली बार था जब कोई महिला फूल-टाइम डायरेक्टर बनी थी. इससे पहले डॉ अल्का कंपनी में स्किल डेवलपमेंट चीफ थीं. 

कंपनी में रहा है काफी योगदान: 

अपने अब तक के कार्यकाल के दौरान डॉ अल्का का कंपनी को आगे बढ़ाने में काफी योगदान रहा है. स्किल डेवलपमेंट चीफ के रूप में उन्होंने ओएनजीसी के कौशल विकास केंद्रों के कामकाज में एकरूपता स्थापित की और गतिविधियों को सुविधाजनक बनाया. 

उन्हें ओएनजीसी में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (एनएपीएस) को लागू करने के लिए भी जाना जाता है. जिसमें आज सभी कार्य केंद्रों में 5000 से अधिक प्रशिक्षु शामिल हैं. उन्होंने पहले कॉर्पोरेट कार्यालय में प्रमुख सीएसआर के रूप में काम किया था और पूरे भारत में प्रमुख सीएसआर परियोजनाएं शुरू की थीं.

साथ ही, उन्होंने विशेष रूप से अपतटीय प्लेटफार्मों और दूरगामी क्षेत्रों पर नियुक्त महिला कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए एक सुरक्षित वर्कप्लेस तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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