रुद्रप्रयाग

मजदूर घर जाने को काट रहे कलेक्ट्रेट का चक्कर, नहीं हो रही कोई सुनवाई

रुद्रप्रयागः लॉकडाउन के चलते देश के कोने-कोने में प्रवासी लोग फंसे हुए हैं. सरकार इन्हें वापस लाने और छोड़ने का काम कर रही है. रोजी-रोटी का भी संकट गहराने के बाद कई मजदूर पैदल ही अपने घरों की ओर निकले हैं. रुद्रप्रयाग के सतेरखाल में भी यूपी के तीस से ज्यादा प्रवासी मजजूर फंसे हैं. ये लोग एक हफ्ते से घर जाने के लिए डीएम ऑफिस का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन मजदूरों की मांग पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

दूसरे प्रदेशों में रह रहे उत्तराखंड के लोगों को तो वापस लाया जा रहा है, लेकिन रुद्रप्रयाग जिले में रह रहे यूपी-बिहार के मजदूरों को यहां से घर नहीं भेजा जा रहा है. बीते सप्ताह रोजी-रोटी का संकट गहराने के बाद ये सभी मजदूर अपना सारा सामान लेकर पैदल ही अपने घरों के लिए निकले, लेकिन रास्ते में पुलिस ने मजदूरों को रोक दिया और वापस भेज दिया. इसके बाद ये मजदूर अगस्त्यमुनि में रह रहे हैं.

इन मजदूरों को दो महीने से काम नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण ये मजदूर किसी भी तरह से अपने घर जाना चाहते हैं. घर जाने के लिए बीते एक हफ्ते से मजदूर रुद्रप्रयाग डीएम ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं. मजदूरों का आरोप है कि उनकी मांग को अनसुना किया जा रहा है. मजदूरों का कहना है कि काम न होने से खाने की दिक्कतें हैं. ऐसे में वो घर जाना चाहते हैं.

वहीं, मामले में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि शासन स्तर से वार्ता की जा रही है. मजदूरों को तभी भेजा जाएगा, जब उनके प्रदेश से कोई निर्देश जारी होंगे. फिलहाल जिले में रह रहे सभी मजदूरों के रहने, खाने आदि की व्यवस्था की गई है.