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कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

हरिद्वार: आज कार्तिक पूर्णिमा का पर्व है और इस दिन का हिन्दू धर्म के लोगों के लिए खास महत्व है. कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है.

वहीं कार्तिक पूर्णिमा का शैव के साथ ही वैष्णव दोनों ही समुदायों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. वहीं धर्मनगरी में सुबह से मंदिरों और गंगा घाटों पर भक्तों का तांता लगा हुआ है. लोगों ने सुख-समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना की.

श्रद्धालु सुबह से गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान के बाद पूजा करने से भक्तों के सारे मनोरथ पूरे होते हैं.

मान्यता है कि इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था. इसी दिन गुरुनानक देव का जन्म भी हुआ था इसलिए इसको प्रकाश और गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

धर्मनगरी में कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर गंगा स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. गंगा स्नान के लिए सुबह से ही श्रद्धालु हर की पौड़ी पर पहुंचने शुरू हो गए थे.

सुबह तड़के ही हरकी पौड़ी पर श्रद्धालुओं की भारी देखने को मिली.वहीं श्रद्धालुओं का कहना है कि आज कार्तिक पूर्णिमा का स्नान है कार्तिक पूर्णिमा एक महीने से चल रही थी और आज पूर्ण हुई है. उन्होंने कहा कि आज के दिन गंगा स्नान करने से रोज गंगा स्नान करने की जरूरत नहीं होती.

आज के दिन स्नान करने से काफी फल मिलता है और इस दिन दान पुण्य करने का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने हरिद्वार गंगा स्नान करके काफी अच्छा लगा और हमारा गंगा स्नान करके मन भी पवित्र हो गया.

हरिद्वार हरकी पौड़ी पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु श्रद्धा से मां गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. वहीं कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दीपदान करने का विशेष महत्व है. इस दिन दान करने का विशेष महत्व है. साथ ही माना जाता है कि दान करने से ग्रहों की समस्या दूर हो जाती है.

कार्तिक पूर्णिमा का महत्‍व
माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने से पुण्‍य प्राप्‍त होता है. शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत के लिए भी कार्तिक पूर्णिमा का दिन बेहद अच्‍छा माना जाता है. वहीं कार्तिक मास को दामोदर के नाम से भी जाना जाता है, दामोदर जो कि भगवान विष्‍णु का ही एक नाम है. कार्तिक मास के दौरान लोग पूरे महीने गंगा तथा अन्‍य पवित्र नदियों में स्‍नान करते हैं. कार्तिक मास के पवित्र स्‍नान की शुरुआत शरद पूर्णिमा से होती है और इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन होता है.

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