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राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग

देहरादून। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए सरकार क्षेत्र के विकास का खाका बनाने में जुट गई है। इसके लिए सबसे पहले गैरसैंण को तहसील से उच्चीकृत किया जाएगा। यहां राज्य राजधानी क्षेत्र यानी एससीआर बनाया जाएगा। इसमें चमोली के साथ ही पौड़ी व अल्मोड़ा के क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।

राज्य गठन के बाद प्रदेश की अभी तक कोई स्थायी राजधानी नहीं है। अस्थायी राजधानी के रूप में देहरादून से ही सारे काम हो रहे हैं। राज्य गठन की अवधारणा यह थी कि इस पर्वतीय इलाके में सुदूरवर्ती क्षेत्रों का विकास भी सुनिश्चित हो सके। इसके लिए राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग चली आ रही है।

राज्य गठन के बाद बीसवें साल में अब कहीं जाकर इस दिशा में कदम आगे बढ़े हैं। प्रदेश सरकार ने गैरसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की है। इसका चारों और स्वागत किया जा रहा है। यह बाद दीगर है कि अब इसे स्थायी राजधानी के रूप में घोषित करने की मांग चल रही है।

हालांकि, ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा से कम से कम एक शुरुआत तो हुई है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद प्रदेश सरकार इसके विकास का खाका खींचने में जुट गई है। शुरुआती तौर में गैरसैंण के चारों और एससीआर बनाने की तैयारी है, ताकि यह राजधानी के मानकों को पूरा कर सके।

इसके तहत यहां अस्पताल, विश्वविद्यालय, स्कूल, पेयजल, उद्योग व संचार से संबंधित आदि योजनाएं बनाई जाएंगी। इन्हें मूर्त रूप कैसे दिया जाए, इसके लिए जल्द ही अब मुख्य सचिव अधिकारियों के साथ मिलकर बैठक करेंगे। इसके बाद एक प्रारंभिक खाका खींच कर इसे सरकार के सम्मुख प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में कदम आगे बढ़ाए जाएंगे। सरकार की मंशा इसे महज घोषणा के रूप में रखना नहीं बल्कि धरातल पर उतारना भी है।

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