राष्ट्रीय

दिल्ली हाई कोर्ट ने TMC सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को दिया झटका

देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. जहां पर बंगाल के कथित कोयला घोटाले से जुड़ी मनी लांड्रिंग जांच के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दिल्ली में पेश होने के संबंध में जारी समन को चुनौती देने वाली अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार को खारिज कर दी है.

दरअसल, बीते 10 सितंबर, 2021 को ED द्वारा जारी समन पर जस्टिस रजनीश भटनागर की पीठ ने अभिषेक व उनकी पत्नी को राहत देने से इन्कार कर दिया. इसके साथ ही पीठ ने रुजिरा की एक अन्य याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने मनी लांड्रिंग के तहत उनके खिलाफ ED द्वारा दर्ज शिकायत को चुनौती दी थी. हालांकि, इस मामले का निचली अदालत ने संज्ञान लेकर उन्हें शारीरिक तौर पर पेश होने के संबंध में समन जारी किया था. साथ ही हाई कोर्ट ने बीते 4 फरवरी को सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

जानिए क्या है पूरा मामला?

बता दें कि कोर्ट ने इस मामले में आगे कहा कि यह स्पष्ट है कि विधायिका ने एक खास तरह के अपराध से निपटने के लिए एक अलग तंत्र बनाया है और CRPC में क्षेत्रीय सीमाओं से अवगत होने के बावजूद, विधायिका ने PMLA में उन सीमाओं को शामिल नहीं करने का विकल्प चुना है. चूंकि. सीबीआई ने कुछ लोगों द्वारा पश्चिम बंगाल में किए गए ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के लीजहोल्ड क्षेत्रों से अवैध खनन और कोयले की चोरी के कथित अपराधों के संबंध में एक FIR दर्ज की थी. इसके तहत ED ने  दिल्ली स्थित हेड इन्वेस्टिगेटिव यूनिट में (ECIR) दर्ज किया था। जिसके बाद कोलकाता में रहने वाले अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को दिल्ली में पूछताछ के लिए ईडी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने ED के समन को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और कहा था कि इसकी जांच केवल कोलकाता से संबंधित स्थानीय कार्यालय द्वारा की जा सकता है. हालांकि, याचिका में कहा गया था कि बनर्जी और उनकी पत्नी दोनों का नाम न तो FIR में है और न ही ED की शिकायत में.

ED की जांच पर उठाए थे सवाल

गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा दलीलें सुनने के बाद आदेश को सुरक्षित रख लिया था. हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने ED द्वारा की जा रही जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि यह कार्रवाई सिर्फ उन्हें परेशान करने के लिए की जा रही है, जबकि इसके मुख्य आरोपियों को अनुचित लाभ और सुरक्षा दी जा रही है और इसके बदले में उनसे हमारे बारे में झूठे, आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण बयान देने को कहा जा रहा है.

Leave a Response