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देश के सर्वाधिक प्रदूषित टॉप-10 शहरों में देहरादून भी

देहरादून, एक दौर में दून और सुकून के बीच गहरा रिश्ता था। यहां की आबोहवा स्वच्छ होने से इसे रिटायर्ड लोगों का शहर भी कहा जाता। दूर तक जहां भी नजर जाती आम-लीची से लकदक बाग और फसलों से लहलहाते खेत नजर आते थे। फिर वर्ष 2000 में उत्तराखंड पृथक राज्य बना और दून राजधानी।

इसके बाद शहरीकरण की अनियंत्रित दौड़ में दून और सुकून के बीच का फासला बढ़ता चला गया। जनसंख्या में 40 फीसद से अधिक का इजाफा हो चुका है और वाहनों की संख्या 300 फीसद से भी अधिक दर से बढ़कर नौ लाख का आंकड़ा छूने जा रही है।

इस सबका सर्वाधिक असर यहां की स्वच्छ हवा पर पड़ा, जिसमें रेस्पायरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (श्वसनीय ठोस निलंबित कण) यानी पीएम-10 व 2.5 की मात्रा मानक से चार गुना तक बढ़ गई है।

पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर सबसे पुराने औसत आंकड़े वर्ष 2008 के हैं और तब पीएम-10 की यह स्थिति आज की तुलना में आधी से भी कम (116 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) थी।

आज के ताजा आंकड़ों की बात करें तो जनवरी 2019 से अक्टूबर 2019 के बीच पीएम-10 की अधिकतम मात्रा 240 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से भी अधिक पाई गई है, जबकि वार्षिक औसत आधार पर यह मात्रा 60 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

इसी तरह जिस पीएम-2.5 की मात्रा वार्षिक आधार पर 40 से अधिक नहीं होनी चाहिए, उसके कणों की उपस्थिति हवा में अधिकतम 117 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर भी पाई गई है।

हवा में घुले प्रदूषण कणों की मात्रा बताती है कि वायु प्रदूषण का ग्राफ किस तेजी से बढ़ रहा है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो यहां भी दिल्ली से हालात बनते देर नहीं लगेगी।

पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दून में घंटाघर, रायपुर रोड, आइएसबीटी क्षेत्र में वायु प्रदूषण (पीएम-10 व पीएम-2.5 कणों) की जांच करता है।

जनवरी 2019 से अक्टूबर तक के आंकड़ों पर गौर करें तो आइएसबीटी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का अधिकतम स्तर चार गुना पाया गया है। अन्य क्षेत्रों में भी वायु प्रदूषण मानक से कहीं अधिक है, मगर इसका आंकड़ा तीन गुने का आसपास सिमटा है।

वर्ष 2017 के अंत में केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने देश के तमाम शहरों के वायु प्रदूषण की जो रिपोर्ट संसद में रखी थी, उसमें दून सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में टॉप टेन में शामिल हो गया है।

इस सूची में शामिल देश के तमाम बड़े शहरों से दून जैसे छोटे शहर का आगे निकल जाना खतरे की घंटी बजाता दिख रहा है।

निजी संस्था गति फाउंडेशन ने फरवरी 2018 में अपने स्तर पर हैंड-हेल्ड मशीनों से वायु प्रदूषण की जांच की थी। इस जांच में वायु प्रदूषण का ग्राफ सरकारी आंकड़ों से भी अधिक दिखा।

दूनघाटी का भौगोलिक आकार कटोरानुमा है। इसके चलते यहां वायु प्रदूषण के जो भी कण हैं, वह लंबे समय तक वायुमंडल की निचली सतह में ही घूमते रहते हैं। लंबाई में शहरी क्षेत्र का आकलन करें तो 20 किलोमीटर लंबे व 10 किलोमीटर चौड़े दायरे में ही प्रदूषण फैला रहता है। इसी क्षेत्र में 10 लाख से अधिक की आबादी निवास करती है। समझा जा सकता है कि लाखों लोग किस तरह की हवा में सांस ले रहे हैं।

यह शहर हमारा है और हमें ही इसकी बेहतरी के लिए प्रयास करना है। जहां कहीं भी आपको वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारक दिखें तो उसकी जानकारी जागरण के साथ साझा कर सकते हैं।

जैसे-कोई वाहन अधिक धुआं छोड़ रहा है, कहीं कूड़ा जलाया जा रहा है या निर्माण कार्य के दौरान अधिक धूल उड़ रही है तो आप निम्न ईमेल आइडी या व्हाट्सएप नंबर पर उसकी सूचना चित्र सहित भेज सकते हैं। जागरण आपकी सूचना को उचित फोरम तक पहुंचाएगा और समस्या के निस्तारण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

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