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क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट के रडार पर रहेंगे अपराधी

देहरादून: अपराधियों पर नजर रखने, उनकी कुंडली तैयार करने और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने एसओजी की तर्ज पर एक अलग क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) का गठन किया है. क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट में 11 लोगों को शामिल किया गया है, जिसका इंचार्ज नदीम अतहर को बनाया गया है.

क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट का पहला टास्क शहर में बढ़ते नशे पर लगाम लगाना है. राजधानी में इस तरह अपराध पर रोकथाम के लिए पहली बार कोई अलग से यूनिट बनाई गई है. सीआईयू अपराधियों के संबंध में खुफिया जानकारी जुटाकर उनकी आपराधिक गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाएगी.

डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि सीआईयू में उन्हीं पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनका क्राइम में अच्छा अनुभव रहा है. सीआईयू एक तरह से अपराध और अपराधियों की मुखबिरी का काम करेगी. वारदातों के खुलासे में एसओजी की अहम भूमिका होती है, लेकिन आपराधिक वारदातों को घटित होने से रोकने के लिए कोई स्वतंत्र शाखा नहीं थी. जिसके लिए सीआईयू का गठन किया गया है.

डीआईजी जोशी ने बताया कि सीआईयू का फोकस अपराधियों के बारे में खुफिया जानकारी जुटाकर उनकी आपराधिक गतिविधियों को पूर्वानुमान लगाने पर होगा. इस यूनिट का प्रयास किसी वारदात को घटित होने से पहले वर्कआउट कर रोकने का होगा. यही कारण है कि इस यूनिट में उन्हीं पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनका क्रिमिनल वारदातों को सॉल्व करने में अच्छा अनुभव है.

इस यूनिट को पहला टास्क नशे के खिलाफ दिया गया है. क्योंकि शहर में मादक पादर्थों की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं.

डीआईजी जोशी के मुताबिक, पुलिस ने पिछले छह से सात महीनों में करोड़ों रुपए की ड्रग्स बरामद की है. हालांकि इसके बाद भी ड्रग्स की सप्लाई धड़ल्ले से जारी है. शहर से पूरी तरह ड्रग्स का सफाया करने के लिए इस यूनिट को टास्क दिया गया है. ये यूनिट ड्रग्स के मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास करेगी ताकि इसे जड़ के खत्म किया जा सके.

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