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झारखंड में झामुमो से दोस्ती पर कांग्रेसी नाराज

झारखंड : कांग्रेस महागठबंधन में चुनाव तो लड़ रही है, लेकिन झामुमो-राजद गठबंधन में सीटों के कटने से पार्टी नेता और कार्यकर्ताओं में रोष है। राजधानी रांची, खूंटी, गुमला, घाटशिला, पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

कई नेता-कार्यकर्ता जहां पार्टी छोड़ चुके हैं, वहीं कई छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। जो बागी हो रहे हैं वे दूसरे दलों के प्रत्याशी के समर्थन में काम करने जा रहे हैं।

रांची से कांग्रेस लगातार प्रत्याशी उतारती थी। इस बार यह सीट झामुमो के खाते में है। कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता अब असमंजस में हैं। यही हाल खूंटी, गुमला, सिसई, घाटशिला विधानसभा क्षेत्रों का भी है। पिछली बार इन जगहों पर कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी। टिकट कटने के बाद गुमला, पश्चिमी सिंहभूम की जिला कमेटी ने इस्तीफा दे दिया और दूसरे दलों में शामिल हो गये। घाटशिला सीट के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू ने भी कांग्रेस छोड़ दिया है।

सोच रहे हैं कि झामुमो के लिए कैसे मांगें वोट
कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता दबी जुबान से कहते हैं कि पांच साल तक पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते रहे और अब दूसरे दल के प्रत्याशी के लिए कैसे वोट मांगें? लोकसभा चुनाव के समय कार्यकर्ता कांग्रेस के पक्ष में बूथों को मजबूत कर रहे थे, वे अब अपने घटक दल झामुमो और राजद के प्रत्याशी के लिए वोट मांगेंगे तो जनता क्या जवाब देगी।

वोट ट्रांसफर नहीं कराने का लगा था आरोप
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, झामुमो, झाविमो और राजद का महागठबंधन था। 14 सीटों में कांग्रेस और झामुमो ने एक-एक सीट पर ही जीत हासिल की थी। दो सीटों पर कांग्रेस कम अंतर से हारी थी। कांग्रेस ने झामुमो समेत अन्य घटक दलों पर सहयोग नहीं करने और अपने वोट ट्रांसफर नहीं करवाने का आरोप लगाया था।

अब तक तय नहीं हुआ साझा कार्यक्रम
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-झामुमो-राजद मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। दो चरणों की नामांकन प्रक्रिया खत्म हो गई है। अभी तक तीनों दलों के बीच साझा कार्यक्रम तय नहीं हुआ हैं। न तो घोषणा पत्र जारी हुआ है और न ही साथ में प्रचार की रणनीति बनी है। पहले चरण के तीनों दलों के प्रत्याशी अपने स्तर से प्रचार कर रहे हैं।

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