नेतागिरी

विकास कार्यों में तेजी के लिए एक्शन मोड में आये मुख्यमंत्री पुष्कर धामी

देहरादून : पुष्कर सिंह धामी सरकार एक्शन मोड में है। विकास कार्यों की गति तेज करने के लिए विभागों की कार्यप्रणाली सरकार के निशाने पर है। निर्माण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बनने वाले विभागीय प्रस्तावों को पूरी तैयारी और गुणवत्ता से बनाने के साथ बनाया जाएगा, ताकि आपत्तियों के निराकरण में ही समय बीत न जाए। मुख्य सचिव डा एसएस संधु ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों और प्रभारी सचिवों को निर्देश जारी किए।

प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते विकास कार्यों की धीमी गति को रफ्तार देने की चुनौती को लेकर धामी सरकार अधिक सतर्क हो गई है। सरकार ने विभागों के कामकाज को सुधारने को सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया है। मुख्य सचिव डा एसएस संधु ने विभागों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखनी शुरू कर दी है। विभागीय बैठकों को परिणामोन्मुख बनाने के लिए सात सूत्रीय फार्मूला सामने रखने के बाद अब मुख्य सचिव ने विभागीय प्रस्तावों को बनाने में सावधानी और गुणवत्ता के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में आम जन को सरकार की कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ त्वरित और पारदर्शिता से मिलने की पहली सीढ़ी विभागीय प्रस्ताव ही हैं।

कई चरणों में आपत्तियां लगने से अटक रहे प्रस्ताव

यह देखने में आया है कि विभाग प्रस्ताव बनाने में पर्याप्त सावधानी नहीं बरत रहे हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न प्रशासकीय विभागों और जिलों व फील्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ शासन स्तर पर समीक्षा बैठकों में इस लापरवाही का उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि वन भूमि हस्तांतरण, भूमि आवंटन व अंतरण, परियोजनाओं की तकनीकी व वित्तीय स्वीकृतियों से संबंधित प्रस्तावों में सक्षम स्तर पर परीक्षण के बाद विभिन्न चरणों में कई आपत्तियां लगाई जा रही हैं। साथ में अतिरिक्त सूचनाओं की अपेक्षा भी की जाती है। इसका परिणाम ये होता है कि प्रस्ताव अथवा परियोजनाएं लंबित या अटक जाती हैं।

नई आपत्तियां लगाने को लेनी होगी अनुमति

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि सक्षम स्तर पर प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद सभी बिंदुओं पर एक जांच सूची तैयार की जाएगी। इसके आधार पर प्रस्ताव का संपूर्ण परीक्षण कर एक साथ सभी आपत्तियों को इंगित किया जाएगा। इससे आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण हो सकेगा। पहली बार के बाद दोबारा नई आपत्तियां लगाई जाती हैं तो इसका स्पष्ट कारण तो देना ही होगा, साथ में एक स्तर ऊपर अधिकारी से अनुमति भी लेनी होगी।

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