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इस बार की यात्रा में प्रशासन की बड़ी परीक्षा, बर्फबारी और भूस्खलन जोन बनेंगे चुनौती

उत्तरकाशी। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने में अब महज 40 दिन बचे हैं और यात्रा तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। वहीं, बर्फबारी से यमुनोत्री धाम में मंदिर परिसर का यात्री शेड, घोड़ा पड़ाव और स्नान कुंडों की छत को खासा नुकसान पहुंचा है। इतना ही नहीं, धाम में बर्फ की चादर भी बिछी हुई है। ऐसे में यात्रा तैयारियां अगर समय रहते पूरी नहीं हुईं तो प्रशासन की मुश्किलें बढ़ना तय है।

हिमालय के चार धामों में से गंगोत्री और यमुनोत्री उत्तरकाशी जिले में पड़ते हैं। इन धामों को जोड़ने वाले दोनों हाइवे पर ऑलवेदर निर्माण के चलते डेंजर जोन की संख्या 30 से अधिक पहुंच गई है। वर्ष 2019 के यात्रा सीजन की तुलना में इस बार स्थितियां अलग हैं। डाबरकोट, पाली गाड, धरासू बैंड, चुंगी बड़ेथी, गंगनानी, हेलगु गाड और डबराणी भूस्खलन जोन के साथ ही कई ऐसे स्थान हैं जो हल्की बारिश में भी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। लेकिन, इनकी ओर अभी तक प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। प्रशासन ने दो बैठकें जरूर कीं, लेकिन व्यवस्थाओं को सुचारु करने की सक्रियता अभी नजर धरातल पर नजर नहीं आ रही है।

डाबरकोट का भूस्खलन जोन 

यमुनोत्री हाइवे पर सक्रिय डाबरकोट भूस्खलन जोन इस बार मामूली बारिश में भी दरक सकता है। यहां वैकल्पिक मार्ग के लिए सुरंग बनाने का प्रस्ताव है, लेकिन अभी तक इसकी डीपीआर भी तैयार नहीं हुई

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