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सड़क चौड़ीकरण का मलबा धौली नदी में फेकने से केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड हुआ नाराज़

गोपेश्वर: मलारी नीती हाईवे पर सड़क चौड़ीकरण के दौरान मलबा जंगल व धौली नदी में फेंके जाने की स्थानीय निवासी की शिकायत को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंभीरता से लिया है। बोर्ड के निदेशक डा. अजीत कुमार विद्यार्थी ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया है।

भारत-तिब्बत-चीन सीमा तक पहुंचने के लिए बनी मलारी नीती सड़क के चौड़ीकरण की जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन की ओर से ओइसिस कंपनी को दी गई है। स्थानीय निवासियों की ओर से लंबे समय से निर्माण कंपनी की ओर से किए जा रहे कार्यों का विरोध किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना था कि निर्माण कंपनी की ओर से सड़क चौड़ीकरण के दौरान मलबा व बोल्डर सीधे बेशकीमती देवदार व अन्य प्रजाति के जंगलों या फिर सीधे धौली गंगा में उड़ेला जा रहा है। नीती गांव के निवासी प्रेम सिंह फोनिया व मनोज राणा ने इसकी शिकायत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से की थी।

उनका कहना था कि जिस क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है वहां दुर्लभ प्रजाति के पेड़ों के साथ ही जड़ी बूटियां पाई जाती हैं। मलबा डाले जाने से जंगल व जड़ी बूटियां तहस-नहस हो रही हैं, वहीं अलकनंदा की प्रमुख सहायक नदी धौली गंगा का जल भी प्रदूषित हो रहा है। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसका संज्ञान लिया है। बोर्ड के निदेशक और प्रभाग प्रमुख जल गुणवत्ता प्रबंधक डा. अजीत कुमार विद्यार्थी ने पत्र का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया है। उनका कहना है कि धौली गंगा में सड़क का मलबा डालकर नदी को दूषित किया जाना लापरवाही है। इस मामले में शीघ्र ही लापरवाह निर्माण कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।

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