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केंद्र सरकार का तोहफा, कोलकाता को मिली देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो लाइन

नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने कोलकाता (Kolkata) में विश्‍वस्‍तरीय सुविधाओं वाला फूलबागान मेट्रो स्‍टेशन (Phoolbagan Metro Station) आम लोगों के लिए खोलकर दुर्गापूजा का तोहफा (Durga Puja Gift) दिया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने अक्‍टूबर 2020 की शुरुआत में कोलकाता ईस्‍ट-वेस्‍ट कॉरिडोर (Kolkata East-West Corridor) के फूलबागान मेट्रो स्‍टेशन का उद्घाटन किया था. इस कॉरिडोर की लंबाई 16.6 किमी है, जो हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर हावड़ा (Howrah) को पूर्वी तट पर साल्‍ट लेक सिटी (Salt Lake City) से जोड़ेगा.

जमीन, एलिवेटेड ट्रैक, अंडरवाटर टनल से गुजरेगी मेट्रो
फूलबागान ईस्‍ट-वेस्‍ट मेट्रो कॉरिडोर पर शुरू हुआ पहला अंडरग्राउंड स्‍टेशन है. इस कॉरिडोर पर मेट्रो ट्रेन जमीन, एलिवेटेड ट्रैक्‍स और हुगली नदी में अंडरवाटर टनल से होकर गुजरेगी. कोलकाता मेट्रो में नॉर्थ-साउथ मेन लाइन का एमजी रोड मेट्रो स्‍टेशन आखिरी अंडरग्राउंड स्‍टेशन था, जो सितंबर 1955 में शुरू हुआ था. इसके बाद सभी मेट्रो स्‍टेशन या तो जमीन (Ground Level) पर हैं या एलिवेटेड (Elevated) हैं. पीयूष गोयल ने कहा कि फूलबागान स्‍टेशन पर मेट्रो सेवाओं की शुरुआत रेलवे की ओर से कोलकाता के लोगों के लिए दुर्गापूजा का तोहफा है.

2035 तक हर दिन 10 लाख लोग करने लगेंगे सफर

गोयल ने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक 2035 तक कोलकाता ईस्‍ट-वेस्‍ट मेट्रो कॉरिडोर पर हर दिन 10 लाख लोग सफर करेंगे. ऐसे में इस मेट्रो कॉरिडोर से शहर के लोगों को ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी और लाखों लोगों को एक से दूसरी जगह जाने-आने में आसानी होगी. बता दें कि इस मेट्रो कॉरिडोर पर सफर करने वालों को करीब 1 मिनट तक अंडरवाटर टनल से होकर गुजरने का लुत्‍फ आएगा. इसी रास्‍ते को तय करने में फेरी से 20 मिनट लग जाते हैं. वहीं, हावड़ा ब्रिज से होकर गुजरने पर इस दूरी को तय करने में करीब 1 घंटा तक लग जाता है. हालांकि, ये ट्रैफिक के आधार पर कम या ज्‍यादा हो सकता है.

प्रोजेक्‍ट पर आएगी 8,757 करोड़ रुपये की लागत
केंद्रीय मंत्री गोयल ने बताया कि इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने कोलकाता ईस्‍ट-वेस्‍ट कॉरिडोर प्रोजेक्‍ट की संशोधित लागत को मंजूरी दे दी थी. इस कॉरिडोर को पूरी तरह से तैयार करने में अनुमान के मुताबिक 8,757 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इस प्रोजेक्‍ट को पूरी तरह से तैयार होने में अभी कुछ समय और लगेगा. एक अनुमान के मुताबिक, ये परियोजना दिसंबर 2021 तक शत-प्रतिशत तैयार हो जाएगी. इससे लाखों लोगों को सफर में बड़ी सहूलियत मिलेगी.

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