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बसपा ने पांच जिला पंचायत सदस्यों को निकाला

हरिद्वार, जिला पंचायत अध्यक्ष उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को वोट देना बसपा के पांच जिला पंचायत सदस्यों को महंगा पड़ गया। चुनाव में भाजपा की जीत से नाराज बसपा आलाकमान ने पांच जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

जिला पंचायत अध्यक्ष के उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुभाष वर्मा ने 45 में से 25 वोट पाकर निर्दलीय प्रत्याशी रहे वीरेंद्र सिंह को हराया था। चुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी सुभाष वर्मा पार्टी के 11 जिला पंचायत सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहे थे।

नामांकन के बाद जब अध्यक्ष पद पर दो प्रत्याशी मैदान में शेष रहे तो भाजपा ने जोड़-तोड़ कर जिला पंचायत सदस्यों की घेरेबंदी के प्रयास शुरू कर दिए। वहीं बदले समीकरणों में एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी रहे चौधरी राजेंद्र सिंह और पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद ने आपस में समझौता कर  भाजपा को हराने का तानाबाना बुना।

मतगणना में 45 में से 25 वोट पाकर भाजपा के सुभाष वर्मा ने पहली बार जिला पंचायत में भाजपा का अध्यक्ष बनने का सपना पूरा किया। उनकी जीत में बसपा और कांग्रेस के जिपं सदस्यों के क्रास वोटिंग की खूब चर्चा रही।

बसपा जिलाध्यक्ष लोकेंद्र कुमार चुड़ियाला ने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर भाजपा प्रत्याशी को वोट देने के मामले में पांच जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की।

निष्कासित जिला पंचायत सदस्यों में कुरडी की शारदा देवी, ऐथल बुजुर्ग की गुलनाज, बहादराबाद की मोनिका चौहान, सराय की लतीफन और खडज़ा कुतुबपुर क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य चौधरी विजेंद्र ङ्क्षसह शामिल हैं। बसपा जिलाध्यक्ष ने बताया जिपं अध्यक्ष के उप चुनाव में भाजपा को वोट देने के चलते इन सदस्यों को पार्टी से निष्कासित किया है।

बसपा की ओर से निष्कासित किए गए पांच जिला पंचायत सदस्यों में दो महिला सदस्य ऐसी हैं, जिनके पति व बेटा वर्ष 2017 में पार्टी से विधानसभा का चुनाव भी लड़े चुके हैं।

इनमें झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले भागमल हैं, जिनकी पत्नी सारदा देवी हैं। हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ने  वाले मुकर्रम अंसारी की माता लतीफन पार्टी से निष्कित की गई हैं। इन दो बड़े नेताओं के निष्कासन से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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