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भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने समस्याओँ को लेकर सीईओ को घेरा

देहरादून,  प्रेमनगर व आसपास के क्षेत्र में समस्याओं का अंबार है। बाजार में वाहनों के लिए ना ही पार्किंग की व्यवस्था है और ना ही शौचालय।

उस पर सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु जी का जंजाल बने हुए हैं। स्वच्छता व्यवस्था भी बदहाल है। ऐसी ही तमाम समस्याओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने छावनी परिषद देहरादून की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन का घेराव कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

 

युवा मोर्चा के महानगर महामंत्री राजेश रावत के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने मुख्य अधिशासी अधिकारी को अवगत कराया कि प्रेमनगर बाजार व आसपास के क्षेत्र में समस्याओं का अंबार है। कई मर्तबा कैंट बोर्ड को अवगत कराने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। इससे क्षेत्रवासी परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि प्रेमनगर में पहले आवारा पशुओं को रखने के लिए कांजी हाउस हुआ करता था। पिछले कुछ साल से यह बंद हो गया है। इसलिए सड़क पर घूम रहे आवारा पशु मुसीबत बने हुए हैं। इससे आए दिन वाहन दुघर्टनाएं हो रही हैं। कैंट बोर्ड कोई कदम नही उठा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि नगर निगम देहरादून की तरह क्षेत्र में स्मार्ट वेंडिंग जोन बनाए जाए। इससे सड़क किनारे अतिक्रमण नहीं होगा ओर फल व सब्जी की ठेलियां सुव्यवस्थित तरीके से लग सकेंगी। उन्होंने कहा कि कैंट क्षेत्र के वार्डों में जल्द सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाए।

 

प्रेमनगर बाजार में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करने व वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। घेराव करने वालों में भाजयुमो के महानगर महामंत्री राजेश रावत, सचिन कुमार, तेजिंदर सिंह, चंदन कनौजिया, दीनदयाल पांडे, धीरज बिष्ट, आशीष गुसाईं, संदीप कुमार, पंकज रावत आदि शामिल थे।

 

कैंट बोर्ड गेस्ट हाउस से कमाएगा सालाना तीन लाख

 

छावनी परिषद देहरादून का गढ़ी कैंट स्थित गेस्ट हाउस अब नियमित आय का जरिया बन गया है। कैंट बोर्ड इससे तीन लाख रुपये सालाना कमाई करेगा। यह गेस्ट हाउस पीपीपी मोड पर चला गया है। इसमें प्राइवेट पार्टनर हर माह 25 हजार रुपये कैंट बोर्ड को देगा।

 

दरअसल, छावनी परिषद देहरादून का गढ़ी कैंट में ही गंगोत्री गेस्ट हाउस है। इसमें चार कमरे हैं। इनमें दो एग्जीक्यूटिव व दो वीआइपी रूम शामिल हैं। इस गेस्ट हाउस में कैंट के ही अधिकारी-कर्मचारी रुकते हैं। पर वह भी कभी कभार। ज्यादातर वक्त यह गेस्ट हाउस खाली ही पड़ा रहता है।

 

इसके रखरखाव व कर्मचारियों के वेतन आदि पर सालाना दस लाख से ऊपर खर्च होते हैं। ऐसे में कैंट बोर्ड इस गेस्ट हाउस में कमाई का जरिया तलाशा। इसे पीपीपी मोड पर चलाने का प्रस्ताव बोर्ड में लाया गया। शुरुआती चरण में सभासदों को इसे लेकर कुछ आपत्तियां थी, जिस पर मामला स्थगित रखा गया। सभासदों के तमाम सुझावों को समाहित करते हुए पुन: प्रस्ताव लाया गया। जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब गेस्ट हाउस प्राइवेट पार्टनर के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके बाद इस गेस्ट हाउस में न केवल कैंट के अधिकारी-कर्मचारी, बल्कि बाहर के लोग भी रुक सकेंगे। यह अलग बात है कि उन्हें कैंट बोर्ड के कर्मियों से अधिक किराया देना होगा।

वरियता कैंट कर्मियों को ही दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के तहत संचालन होने से गेस्ट हाउस अधिकांश वक्ता भइसके रंग रोगन आदि का खर्च कैंट बोर्ड वहन करेगा।

बाकि खर्चे प्राइवेट पार्टनर को खुद वहन करने पड़ेंगे। मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन के अनुसार इससे न केवल चीजें व्यवस्थित हो जाएंगी बल्कि कैंट बोर्ड की आमदनी भी बढ़ेगी। गेस्ट हाउस नियमित चलेगा तो उसी अनुरूप इसका रखरखाव भी बेहतर ढंग से होगा।