नेतागिरी

विधानसभा चुनाव में पुरोला का मिथक तोड़ने में जुटी भाजपा और कांग्रेस

उत्तरकाशी : उत्तराखंड के विधानसभा के क्रमांक में पुरोला पहले नंबर पर है, लेकिन अपने विकास के लिए भी इसका प्रदेश में संभवत: पहला नंबर है। इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस व बसपा सहित छह प्रत्याशी मैदान में हैं। वर्तमान में मतदाताओं की संख्या 73785 है। अभी तक के चार चुनाव में बारी-बारी से भाजपा व कांग्रेस के पाले में यह सीट रही है। 2017 में कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार ने जीत दर्ज की। इस बार इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। भाजपा से दुर्गेश्वर लाल और कांग्रेस से मालचंद मैदान में हैं। दुर्गेश्वर लाल 2017 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तीसरे नंबर पर रहे थे।

इस बार दुर्गेश्वर को राष्ट्रीय पार्टी से टिकट मिलने से मुकाबला रोचक हो गया है। भले ही इस विधानसभा चुनाव में पुरोला जिला गठन, 30 से अधिक गांवों को सड़क से जोड़ने और स्वास्थ्य व शिक्षा के प्रमुख मुद्दे हैं, लेकिन ये स्थानीय मुद्दे चुनाव में गायब हैं। सीट की खास बात ये भी है कि राज्यगठन के बाद हुए चुनाव में पुरोला विधानसभा से जो भी विधायक बना, उसे विपक्ष में बैठना पड़ा है। राजनीतिक दल भी इस मिथक को खारिज तो नहीं करते पर हर चुनाव में इस मिथक को तोड़ने का दावा करते हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी मालचंद

ताकत

-चुनाव लड़ने का अनुभव व राजनीतिक रणनीतिकार

-पुरोला क्षेत्र की जनता में पकड़

कमजोरी-

-दो बार विधायक रहने के दौरान विकास कार्य न करने का आरोप

-कांग्रेस संगठन से अपेक्षित सहयोग नहीं

भाजपा प्रत्याशी दुगेश्वर लाल

ताकत

-युवा चेहरा होने के कारण मोरी क्षेत्र में खास पकड़

-भाजपा संगठन का पूरा सहयोग

कमजोरी

-पुरोला व नौगांव ब्लाक में पकड़ कमजोर

-राजनीतिक रणनीति में कमजोर

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