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बिहार में यूथ दिलाएगा वोट, मेनिफेस्टो में सभी पार्टियों ने युवाओं को लुभाया

बिहार में युवा वोटर्स भारी संख्या में हैं. इनका वोट कैसे मिले, इसके लिए पार्टियों ने खास रणनीति बनाई है. घोषणा पत्र में युवाओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के वादे किए गए हैं. उच्च शिक्षा से लेकर रोजगार तक, ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पार्टियां युवाओं को लुभा रही हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी तेजस्वी यादव ने 10 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया है. इसके जवाब में बीजेपी ने 19 लाख नौकरियों का वादा किया है. इस तरह के कई वादे हैं जो युवाओं को ध्यान में रख कर किए गए हैं.

बिहार में युवा वोटर्स की संख्या को देखते हुए उनके हाथ में उम्मीदवारों की जीत-हार का पूरा फैसला सुरक्षित है. युवा वोटर्स जिस पार्टी पर मेहरबान हो जाएं, उस पार्टी की जीत सुनिश्चित है. एक आंड़के के मुताबिक बिहार में ऐसे वोटर्स की तादाद 16 फीसद के आसपास बताई जाती है. संख्या के लिहाज से यह 3 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा है. ऐसे में कौन पार्टी नहीं चाहेगी कि ये वोटर्स उनके पाले में आएं. इसे देखते हुए हर पार्टी ने अपना घोषणा पत्र तैयार किया है और युवाओं के लिए बड़े-बड़े वादे किए हैं.

रोजगार के मुद्दे पर भिड़ीं पार्टियां
अभी हाल में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि उनकी सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में 10 लाख युवाओं को नौकरी का आदेश पारित किया जाएगा. तेजस्वी यादव ने कहा कि बजट में 4.5 लाख रोजगार देने का प्रावधान है जो बिहार में पद रिक्त हैं. नीति आयोग के मुताबिक बिहार की तरक्की के लिए 5.5 लाख रोजगार की जरूरत है. अगर इच्छाशक्ति हो तो यह (रोजगार) संभव है. तेजस्वी यादव के इस वादे पर नीतीश कुमार ने पलटवार किया और पूछा कि इतनी नौकरियों के लिए पैसा क्या जेल से आएगा? नीतीश कुमार का यह बयान लालू यादव के रांची जेल में बंद होने को लेकर था. नीतीश कुमार का दावा है कि उनकी सरकार ने बिहार में 6 लाख युवाओं को रोजगार दिया है.

आरजेडी की तरह लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने भी रोजगार देने का वादा किया है. हालांकि एलजेपी ने रोजगार का आंकड़ा पेश नहीं किया है लेकिन अपने घोषणा पत्र ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ में इसका जिक्र किया है. एलजेपी ने कहा है कि उसकी सरकार बनने पर समान काम-समान वेतन व्यवस्था बनाई जाएगी और साथ में युवा आयोग का गठन भी किया जाएगा. एलजेपी ने युवाओं के लिए कई ऐलान किए हैं, जैसे कि बिहार में फिल्म सिटी और विश्वस्तरीय स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा. सभी जिलों में मल्टीलेवल स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना की जाएगी और सभी प्रखंडों में आधुनिक इंडोर स्टेडियम बनाया जाएगा. एलजेपी का यह भी वादा है कि क्लास 1 से पीजी तक के युवक और युवतियों के लिए खेल विश्वविद्यालय की स्थापना बिहार में की जाएगी.

जेडीयू का वादा
जेडीयू ने तेजस्वी यादव के 10 लाख रोजगार वाले बयान पर निशाना साधते हुए बिहार के युवाओं को स्वावलंबी बनाने का वादा किया है. गुरुवार को जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि नौजवानों को बेवकूफ़ बनाकर उन्हें बरगला कर ये गद्दी अपनाना चाहते हैं. जो प्लान इन लोगों ने बनाया है उसके लिए पांच लाख करोड़ का बजट चाहिए. उनको यह बताना चाहिए की ये पैसा इतना राजस्व कहां से लाएंगे? ये बोल रहे हैं, हम 10 लाख नौकरियां देंगे. हमारा कहना है हम बिहार को सक्षम और स्वावलंबी बनाएंगे. युवाओं को इतना सक्षम बनाएंगे कि वे अपने साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें. जेडीयू ने अपना काम गिनाते हुए कहा है कि हर जिले में मेगा-स्किल सेंटर बनाया गया, कौशल और उद्यमिता के लिए नया विभाग बना और उद्यमिता विकास के लिए अनुदान/प्रोत्साहन दिया गया. जेडीयू का दावा है कि इसे आगे भी बढ़ाया जाएगा.

कांग्रेस का संकल्प
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र को ‘संकल्प बदलाव का’ नाम दिया है. कांग्रेस ने युवाओं को रोजगार देने का वादा किया है. कांग्रेस ने कहा है कि सरकार बनने पर 10 लाख युवाओं को रोजगार देंगे और खाली पड़े सरकारी पदों पर डेढ़ साल में भर्ती करेंगे. कांग्रेस ने 1500 रुपये प्रति महीना बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया है. कांग्रेस का वादा है कि सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में 10 लाख रोजगार का फैसला किया जाएगा. कांग्रेस की ओर से जारी बदलाव पत्र 2020 में बिहार में मद्य निषेध कानून की समीक्षा को भी अपने एजेंडा में शामिल किया है. कांग्रेस का कहना है कि बिहार में शराब माफिया को सरकार का संरक्षण प्राप्त है, इसलिए शराबबंदी कानून की समीक्षा की जाएगी.

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