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चमोली में भालुओं के हमले की घटनाओ से दहशत में ग्रामीण

चमोली: पहाड़ों में अब तक गुलदार को आंतक का पर्याय माना था और मानव-वन्यजीव संघर्ष के सबसे ज़्यादा मामले इसी के आते हैं लेकिन अब भालुओं के हमले की घटनाएं भी पहाड़ों में बढ़ रही हैं. भालुओं के हमलों में लोगों को जान से भी हाथ धोना पड़ा है और कई लोग तो अस्पताओं में ज़िंदगी की जंग लड़ रहे हैं. चिंताजनक बात यह है कि भालू अब गांव के अंदर घुसकर हमले कर रहे हैं और वन विभाग बस मुआवज़े में दिए जाने वाले पैसे गिन रहा है.

मवेशियों को भी बना रहे शिकार 

पहाड़ों में जंगली जानवरों के हमले की घटनाओं में चमोली ज़िला भी पीछे नहीं रहा है. यहां के ग्रामीण इलाक़ों में इस बार सबसे ज्यादा जो घटनाएं भालुओं के हमले की हुई हैं. ज़िले में इस साल भालुओं के हमले में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 17 घायल हुए हैं. इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो अब भी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं. भालुओं ने ज़िले में मानव ही नहीं इस बार 23 मवेशियों को भी शिकार बनाया है.

वन क्षेत्रों के लिहाज से बात करें तो इस बार ज़िले में केदारनाथ वन प्रभाग के तहत आने वाले क्षेत्र में भालुओं के हमले की 7 घटनाएं हुई हैं. इनमें एक व्यक्ति की मौत हुई है तो छह घायल हुए हैं. बदरीनाथ वन प्रभाग में भी भालू के हमले की नौ घटनाएं हुई हैं. इसमें एक महिला की मौत हुई है जबकि आठ अन्य घायल हो गए हैं.

बर्फ़बारी भी है वजह 

नंदा देवी बायोस्फ़ीयर्स क्षेत्र में भालुओं के हमले की चार घटनाएं हुई हैं जिसमें एक व्यक्ति की मौत के साथ ही तीन अन्य घायल हुए हैं. बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफ़ओ आशुतोष सिंह कहते हैं कि भालुओं के हमले के सभी मामलों में मुआवज़ा दे दिया गया है.

वह अनुमान लगाते हैं कि इस समय पहाड़ों पर अत्यधिक बर्फ़बारी होने के चलते जंगली जानवरों का निचले इलाकों की ओर आना भी इन हमलों में वृद्धि की एक वजह हो सकती है. हालांकि इन हमलों से बचने के किसी उपाय के बारे में वह चर्चा नहीं करते.एक तरफ जहां इंसान जंगली जानवरों के क्षेत्र पर अतिक्रमण करने की कोशिश कर रहा है वहीं अब पहाड़ी इलाकों में बढ़ते जंगली जानवरों के हमले की कीमत इंसानों को भी चुकानी पड़ रही है.

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