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अटल आयुष्मान योजना के बजट में एक तिहाई की कटौती कर दी गई

देहरादून। स्वास्थ्य के मोर्चे पर इस बार का बजट सतही नजर आता है। अटल आयुष्मान योजना के बजट में एक तिहाई की कटौती कर दी गई है। पिछले साल की तुलना में स्वास्थ्य के लिए आवंटित बजट में करीब दो फीसद की मामूली वृद्धि की गई है। जबकि, स्वास्थ्य क्षेत्र में अवस्थापना से लेकर मानव शक्ति तक चुनौतियों का अंबार है।

पिछले साल वर्ष जहां 2427.71 करोड़ रुपये का बजट था, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण के लिए इस बार 2477.02 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। भविष्य का खाका रखते हुए भी बजट में उन्हीं बातों का दोहराव दिखता है जो एक अर्से से की जा रही हैं। यह अलग बात है कि स्वास्थ्य की दशा और दिशा फिर नहीं सुधर पाई है।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी हुई हैं। राज्य गठन के बाद अभी तक प्रदेश में आई सरकारें स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने में नाकाम रहीं हैं। इतना ही नहीं, सभी सरकारों ने इस बात को स्वीकार भी किया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना सबसे बड़ी चुनौती है। पर इस बजट में ऐसा कुछ ही करिश्माई नहीं दिखता, जिससे सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की सूरत बदलने का दम भरे।

यह स्थिति तब है जब जन सामान्य को स्वास्थ्य सेवाओं की सहज उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता रही है। अटल आयुष्मान योजना के लिए भी गत वर्ष 150 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था, जिसे घटाकर अब 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

विश्व बैंक पोषित उतराखंड हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत सरकार का पूरा फोकस लोक निजी सहभागिता पर है। पीपीपी मोड से यह लगाव जन स्वास्थ्य के लिहाज से कितना मुफीद होगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल, बजट को देख यही प्रतीत होता है कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं केंद्र की बैसाखी के ही सहारे हैं। किसी भी बड़े बदलाव के लिए सरकारें केंद्र का मुंह ताकती रही हैं और इस बार भी राज्य के बजट में ऐसा कुछ नहीं दिखता जो स्वास्थ्य क्षेत्र का कायाकल्प कर दे।

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