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गांवों को जोड़ने वाली सड़क बदहाल होने से दारमा घाटी के ग्रामीणों में आक्रोश

धारचूला : पिछले आठ माह से सड़क, स्वास्थ्य की समस्या झेल रहे दारमा घाटी के एक दर्जन गांवों के ग्रामीण अब आक्रोश में हैं। गांवों को जोड़ने वाली सड़क बदहाल स्थिति में हैं। अगले माह से माइग्रेशन शुरू होना है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब समस्याओं को दूर नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

पिछले वर्ष मानसून काल में हुई बारिश से दारमा घाटी को जोड़ने वाली सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। पांच माह तक आवागमन ठप रहा था, अभी भी सड़क कई हिस्सों में बंद पड़ी है, जिसके चलते दारमा वैली के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों के लोगों को खासी दिक्कत हो रही है। सड़क टूट जाने से क्षेत्र में खाद्यान्न का संकट भी उठ खड़ा हुआ था। प्रशासन को खाद्यान्न आपूर्ति के लिए हेलीकाप्टर लगाने पड़े थे। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा की कोई व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों को 50 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर उपचार के लिए तहसील मुख्यालय आना पड़ रहा है।

क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने दिलिग दारमा समिति के बैनर तले बुधवार को उपजिलाधिकारी एके शुक्ला के सामने अपनी समस्या रखी। ग्रामीणों ने बंद सड़क से होने वाली दिक्कतें गिनाई। माइग्रेशन वाले गांवों के लोग अप्रैल से वापस लौटने लगेंगे। सड़क खराब होने के चलते उन्हें भी खासी दिक्कत झेलनी पड़ेगी। उच्च हिमालयी गांवों में राशन पहुंचाने के लिए प्रशासन के पास अब मात्र ढाई माह का समय बचा है। सड़क जल्द ठीक नहीं हुई तो इस वर्ष भी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित खाद्यान्न गोदामों में राशन पहुंचाने में दिक्कत आ सकती है। ग्रामीणों ने गांवों में चिकित्सा टीम भेजकर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं भी दिए जाने की भी मांग की। उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से कार्य हो रहे हैं। जल्द ही सड़क ठीक कर ली जाएगी।

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