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निराश्रित युवतियों को सहारा देने वाला अल्मोड़ा का आश्रय गृह बना बेसहारा

अल्मोड़ा : लोकार्पण के दो महीने बाद भी प्रदेश का पहला राजकीय उत्तर रक्षा आश्रय गृह संचालित नहीं हुआ है। अब भी बेसहारा युवतियों व महिलाओं को भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हाल यह है कि न तो यहां स्टाफ है न ही कोई सामान। यह कब तक शुरू होगा, इसका जवाब किसी जिम्मेदार अधिकारी के पास भी नहीं है।

सरकार ने श्रेय लेने के लिए चुनाव से दो माह पूर्व जोर-शोर से राजकीय उत्तर रक्षा आश्रय गृह का लोकार्पण किया। इस भवन का लोकार्पण बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने किया था। इस आश्रय गृह के निर्माण में चार करोड़ 32 लाख 92 हजार रुपये खर्च हुए थे। इसमें 16 कमरे बनाए गए हैं। लोकार्पण पर किए गए बड़े-बड़े दावे अब तक धरातल में नहीं उतर पाए हैं।

उत्तररक्षा आश्रय गृह का उद्देश्य 18 वर्ष से अधिक की निराश्रित युवतियों को आश्रय दिया जाना था। यहां शिक्षा के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजनाएं चलाई जानी थी। ताकि महिलाएं यहां से निकलने के बाद स्वरोजगार कर सकें। अब तक युवतियों को नारी निकेतन भेज दिया जाता था। जिससे निराश्रितों को भविष्य संवारने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। बर्तन न बिस्तर, कर्मचारियों की व्यवस्था भी नहीं

भवन बनने के बाद दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में इसका लोकार्पण भी कर दिया गया। लेकिन अब तक इसमें न तो युवतियों के लिए खाने के लिए बर्तनों की व्यवस्था की गई है और न ही वहां पर सोने के लिए बैड हैं। वहीं इस आश्रय गृह के संचालन के लिए अधीक्षक व कर्मचारियों की भी नियुक्ति नहीं हुई है।

शासन स्तर से तय होना है कि इस आश्रय गृह में कितने लोगों को रखा जा सकता है। यहां की व्यवस्थाओं व इस आश्रय गृह के संचालन के लिए शासन को लिखा गया है। शासन से आदेश प्राप्त होते ही इसे संचालित किया जाएगा।

– राजीव नयन तिवारी, समाज कल्याण अधिकारी, अल्मोड़ा

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