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अलर्ट! Google Chrome और मोजिला यूजर्स को हो सकता है हैकिंग का खतरा

नई दिल्ली| कंटेंट सर्च करने और वेब ब्राउजिंग के लिए ज्यादातर यूजर्स गूगल क्रोम (Google Chrome) या मोजिला फायरफॉक्स का इस्तेमाल करते हैं| ये दुनिया के सबसे सेफ वेब ब्राउजर्स में से एक हैं| हालांकि, कभी-कभी अपनी हाई-डिमांड और वाइड रीच की वजह से ये प्लेटफॉर्म भी एक्सर हैकिंग का शिकार बन जाते हैं| अगर आप भी अपने डेली वर्क के लिए इन ब्राउजर पर निर्भर हैं तो इन्हें तुरंत अपडेट कर लें, नहीं तो आपका पर्सनल डेटा हैक हो सकता है| दरअसल, भारत सरकार की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम

(CERT-In) ने हाल ही इंडियन यूजर्स के लिए गूगल क्रोम और मोजिला को लेकर एक अलर्ट जारी किया है| CERT-In ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ब्राउजर में कुछ खामियों को स्पॉट किया गया है जो हैकर्स को यूजर्स के डेटा को एक्सेस करने में मदद कर रही हैं और साथ ही सिस्टम की सिक्योरिटी को ब्रेक करके आर्बिटरी कोड्स को एक्जिक्यूट कर रहे हैं|

इन क्रोम OS वर्जन पर है हाई रिस्क

सिक्योरिटी एंजसी ने गूगल क्रोम में आई इस खामी को हाई रिस्क पर मार्क किया है| सीईआरटी-इन ने गूगल क्रोम के 96.0.4664.209 से पहले वाले क्रोम OS वर्जन को हाई रिस्क पर रेट किया है| इसमें Google की ओर से CVE-2021-43527, CVE-2022-1489, CVE-2022-1633, CVE-202-1636, CVE-2022-1859, CVE-2022-1867 और CVE-2022-23308 में आई को मार्क किया गया है। टेक दिग्गज ने बग्स को एक्सेप्ट किया है और कहा कि इसने बताया है की कंपनी के एंड से सभी बग्स को ठीक कर दिया है। कंपनी ने यूजर्स को इन बग्स से सिक्योर रहने के लिए क्रोम ओएस का लेटेस्ट वर्जन डाउनलोड करने की सलाह दी है|

Mozilla Firefox के इन वर्जन में आई खामी
इसी के साथ, अगर मोजिला फायरफॉक्स की बात करें तो CERT-In ने Mozilla Firefox iOS version के 101 तक वाले अपडेट्स में खामियों की पुष्टि की है| मोजिला में आई सभी खामियों को हाई रिस्क पर रेट किया गया है| सीईआरटी-इन ने 101 से पहले मोजिला फायरफॉक्स iOS वर्जन में, 91.10 से पहले मोजिला फायरफॉक्स थंडरबर्ड वर्जन, 91.10 से पहले मोजिला फायरफॉक्स ईएसआर वर्जन, और 101 से पहले मोजिला फायरफॉक्स वर्जन में बग को फ्लैग किया है। कंपनी के मुताबिक, इन खामियों का फायदा हैकर्स टारगेट यूजर्स की पर्सनल और सेंसिटिव जानकारी को एक्सेस करने, बाईपास सिक्योरिटी रेस्ट्रिक्शन और आर्बिटरी कोड को एक्जिक्यूट करने के लिए कर रहे हैं|

सीईआरटी-इन के अनुसार, ये खामियां हैकर्स को टारगेट सिस्टम पर डिनायल ऑफ सर्विस अटैक करने के लिए एक्सेस देती हैं| डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) अटैक तब होता है जब यूजर्स इनफार्मेशन सिस्टम, डिवाइस और दूसरे रिसोर्स का एक्सेस करने में असमर्थ होते हैं। जिन सेवाओं को आमतौर पर ऐसे हमलों का इस्तेमाल करके टारगेट किया जाता है उनमें ईमेल, वेबसाइट, ऑनलाइन अकाउंट आदि शामिल हैं।

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