राष्ट्रीय

मणिपुर विधानसभा चुनाव के लिए AFSPA कानून अहम चुनावी मुद्दा

नगालैंड में 4 दिसंबर को सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत के बाद से ‘सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम 1958’ को निरस्त किए जाने की मांग तेजी से उठने लगी है. राजनीतिक जगत के कई नेताओं ने इस कानून को वापस लिए जाने की मांग की है. संभावना जताई जा रही है कि अगले साल की शुरुआत में मणिपुर में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों (Manipur Assembly Elections) में AFSPA का निरसन एक बड़ा मुद्दा साबित होने वाला है.

सत्तारूढ़ बीजेपी के दो महत्वपूर्ण सहयोगियों- नगा पीपुल्स फ्रंट (Naga People’s Front) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (National People’s Party) के बाद मणिपुर में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) ने शनिवार को पूर्वोत्तर राज्य से अफस्पा (Armed Forces (Special Powers) Act) को वापस लेने की मांग की. एनपीपी और एनपीएफ ने हाल ही में इस “कठोर” कानून को निरस्त करने की अपनी मांग दोहराई थी. उनका मानना है कि इस कानून ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद को नियंत्रित करने में किसी भी तरह से मदद नहीं की.

सत्ता में आते ही AFSPA को रद्द करेंगे- कांग्रेस

मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र (Keisham Meghachandra) ने शनिवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह (N. Biren Singh) से संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर AFSPA को निरस्त करने के लिए दबाव बनाने की अपील की. उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मणिपुर कैबिनेट (Manipur Cabinet) को पूरे राज्य से अफ्सपा को तत्काल हटाने के लिए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए.’

मेघचंद्र ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहले मणिपुर के सात विधानसभा क्षेत्रों से अफस्पा हटा दिया था. उन्होंने कहा, ‘अगर 2022 के चुनावों में कांग्रेस सत्ता में वापस आती है, तो पहली कैबिनेट की बैठक में पूरे मणिपुर राज्य से अफस्पा को तत्काल और पूरी तरह से हटाने पर फैसला लिया जाएगा.’ विधानसभा चुनावों में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. बीजेपी, कांग्रेस, एनपीपी सहित अन्य सभी राजनीतिक दल मणिपुर में चुनावी प्रचार में बिजी हैं. 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा के साथ अगले साल फरवरी-मार्च में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं.

क्या है अफस्पा (AFSPA)?

ये एक कानून है, जिसका पूरा नाम आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट है. इस कानून को साल 1958 में लागू किया गया था और देश के कई ‘अशांत’ इलाकों में इसे लागू किया गया है. आफस्पा को समझने से पहले इसके इतिहास को समझा जाना जरूरी है. दरअसल साल 1942 में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के पूर्वी बॉर्डर में हो रहे हमले को लेकर भारतीय सेना और जापान के सैनिकों के बीच खास अलायंस हुआ था. इसके साथ ही सेना के लिए एक ऑर्डिनेंस पास किया गया था, जिसमें सेना को किसी मारने, प्रोपर्टी को नष्ट करने और गिरफ्तार करने के लिए स्पेशल पावर दिए गए थे. माना जाता है कि ये ही आज के आफस्पा की बुनियाद है. कुछ राज्यों में राज्य सरकार और पुलिस-प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहती हैं. केंद्र सरकार उस क्षेत्र को ‘डिस्टर्ब एरिया’ घोषित कर आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना को तैनात कर देती है. ऐसे में सेना को खास पावर दिए जाते हैं, जिससे कि अलगाववाद जैसी घटनाओं को रोका जा सके और ऐसा ही नगालैंड में भी है.

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