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सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में नेटवर्क बना लोगो के लिए आफ़त

लैंसडौन : कमला देवी पिछले कई दिनों से सरकारी सस्ता गल्ले की दुकानों से बैरंग वापस लौट रही है। कमला देवी ही नहीं, उन जैसे कई ग्रामीणों को भी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में राशन उपलब्ध होने के बावजूद राशन नहीं मिल पा रहा है।

दरअसल, खाद्य विभाग की ओर से अक्टूबर माह के बाद सभी सरकारी गल्ले की दुकानों में बायोमैट्रिक सिस्टम लागू कर दिया गया है। नेटवर्क के अभाव में कई जगह बायोमैट्रिक सिस्टम कार्य नहीं कर रहा, जिस कारण ग्रामीणों को राशन नहीं मिल पा रहा है।

लैंसडौन में खाद्य निरीक्षक के अंतर्गत आने वाले सिसल्डी, चुंडई, गुमखाल, पालकोट, धोबीघाट, जयहरीखाल समेत लैंसडौन नगर क्षेत्र के 3900 राशन कार्डधारक हैं। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत बीपीएल व प्राइमरी हाउस होल्डर को भी अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट (एनएफएसए) के अंतर्गत शामिल कर दिया गया है, जिसमें प्रत्येक कार्डधारक को पांच किलो गेहूं व ढाई किलो चावल मिलता है। अंत्योदय योजना में कार्डधारक को एक किलो चीनी देने का भी प्रावधान है।

लैंसडौन क्षेत्र में गत अक्टूबर माह से बायोमैट्रिक सिस्टम लागू कर दिया गया है, जिसमें प्रत्येक राशन डीलर को सौ रुपये इंटरनेट के लिए दिए जाते हैं, लेकिन क्षेत्र में मोबाइल फोन के सिग्नल अक्सर गायब रहते हैं, जिस कारण बायोमैट्रिक मशीनें महज शोपीस बनकर रह गई हैं। गांवों से मीलों पैदल दूरी तय करके ग्रामीण राशन की दुकान में पहुंच रहे हैं, लेकिन बायोमैट्रिक सिस्टम न चलने के कारण उन्हें बिना राशन लिए ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

जहरीखाल निवासी सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि यदि खाद्य विभाग इस समस्या का निस्तारण शीघ्र नहीं करता, तो मजबूरन ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना होगा।

इधर, खाद्य निरीक्षक अभिषेक कंडवाल ने बताया कि मोबाइल सिग्नल पूरी तरह से न मिलने के कारण समस्या बनी हुई है। बताया कि उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देश है कि बिना बायोमैट्रिक सिस्टम के किसी ग्राहक को राशन नहीं दिया जाएगा।

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