दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इमरजेंसी में एमएसडब्ल्यू (मेडिकल सोशल वर्कर) ने ड्यूटी से हाथ खड़े कर दिए हैं। सभी एमएसडब्ल्यू ने इस संबंध में प्राचार्य को सामूहिक चिट्ठी सौंप दी है।मेडिकल सोशल वर्कर ने कहा कि उनका काम मरीजों की काउंसिलिंग करना है। उन्हें पीएमआर, गायनी, मानसिक रोग, पीडिया, कम्युनिटी मेडिसिन, टीबी चेस्ट विभाग में पोस्टिंग दी गई है। लेकिन रोस्टरवार उनसे इमरजेंसी के पीआरओ कार्यालय में ड्यूटी करवाई जा रही है। रविवार को भी ड्यूटी लगती है। मरीजों की सेवा से उन्हें कोई एतराज नहीं है। लेकिन उनके मूल विभाग का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
उनसे इमरजेंसी में स्ट्रेचर, व्हील चेयर उठाने, उन्हें रखने, मोर्चरी में शवों को रखवाने एवं परिजनों को सुपुर्द करने का कार्य भी करवाया जा रहा है। जो वार्ड ब्वॉय का कार्य है। उन्हें मरीजों की समस्याओं के समाधान को वार्डों में जाना पड़ता है। काउंटर पर कई बार नोकझोंक झेलनी पड़ रही है। प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि एमएसडब्ल्यू मरीजों एवं डॉक्टरों के बीच अहम कड़ी है और उनका कार्य ही चिकित्सा में सामाजिक कार्यों का है। जो सराहनीय रहा है। कुछ समस्याएं बताई है। जिसे हल कर रहे हैं।
दून की इमरजेंसी में सामान्य मेडिकल पर रोक
दून अस्पताल की इमरजेंसी में मेडिकल के नाम पर उगाही के मामले सामने आने के बाद प्राचार्य की सख्ती पर सिस्टम हरकत में आया है। एमएस डॉ. अनुराग अग्रवाल के निर्देशों पर प्रभारी डॉ. एनएस बिष्ट ने सभी इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को सात बिंदुओं पर सख्त हिदायतें जारी की है। वहीं, उगाही के मामले में तमाम चर्चाएं व्याप्त है। प्रबंधन एवं इमरजेंसी में समन्वय के अभाव की भी बात सामने आई है। डॉ. बिष्ट की ओर से जारी आदेश में एमएलसी (मेडिको लीगल केस) के अलावा किसी चिकित्सा प्रमाण पत्र या दस्तावेज सत्यापन का कार्य एमएस की बिना अनुमति नहीं होगा। मेडिकल की निर्धारित फीस लेने के बाद रसीद देकर राशि रोजाना जमा करानी होगी।
अज्ञात एवं लावारिस मरीजों के उपचार में लापरवाही की शिकायतों पर उन्हें हर हाल में उपचार देने, अंडर कस्टडी, कैदी को इलाज में वरीयता, बिना उच्चाधिकारियों को बताए ड्यूटी आपस में नहीं बदलेंगे। इमरजेंसी एवं भर्ती पर्ची पर स्पष्ट मुहर लगानी होगी। बिना हस्ताक्षर एवं मुहर के कागज फर्जीवाडा माना जाएगा। फैकल्टी के नहीं होने पर तुरंत इलाज शुरू करेंगे और उच्चाधिकारियों को जानकारी देंगे।
इमरजेंसी, प्रबंधन में समन्वय नहीं, कमरों के भी विवाद
सूत्रों ने बताया कि कई डॉक्टर एवं कर्मचारी यहां मेडिकल के नाम पर उगाही में तो संलिप्त है ही, साथ ही गुटबाजी भी चरम पर है। यहां पर प्रबंधन एवं इमरजेंसी में समन्वय नहीं है। दो गुटों में आपसी टकराव से मरीजों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक कुछ डॉक्टर आरोपियों का बचाव कर रहे हैं, तो कुछ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं इमरजेंसी में दो कमरों को लेकर भी वर्चस्व की लड़ाई सामने आई है। इमरजेंसी से कुछ कर्मचारियों के द्वारा ड्यूटी से इनकार को भी कमरों की लड़ाई से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे लेकर तमाम चर्चाएं व्याप्त है।
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना बोले, इमरजेंसी में गुटबाजी बर्दाश्त नहीं होगी। कई सूचनाएं उन्हें मिली है। जिनकी पड़ताल करवाई जा रही है। मरीजों से उगाही एवं इलाज नहीं करने वालों पर जल्द कार्रवाई देखने को मिलेगी। मरीजों के हित में कार्य करने को कहा गया है।