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तेंदुओं के हमले से 700 गांव बन गए ‘भूतिया’, दहशत से घर छोड़ रहे लोग

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में तेंदुओं का खौफ बढ़ता जा रहा है. राज्य में तेंदुओं के हमलों के बाद अब लोग अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर भाग रहे हैं. कई गांवों में लोगों का सामान्य जीवन इससे प्रभावित हो रहा है. साल 2018 में सरकार के निष्कर्षों के मुताबिक राज्य में 700 ‘भूत गांव’ हैं. कई गावों में तेंदुओं की वजह से लोगों की दैनिक जीवन शैली बुरी तरह प्रभावित हो रही है.लोग शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं.

डर की वजह से अपने पुश्तैनी घरों से भाग रहे लोग

पिछले साल जून में अपने खेत की जुताई कर रहीं 55 साल की गोदावरी देवी पर अचानक एक तेंदुए ने उन पर हमला किया और उन्हें मार डाला. उत्तराखंड में गोदावरी जैसे और भी कई लोग हैं, जो या तो तेंदुओं का शिकार हो गए या डर की वजह से अपने पुश्तैनी घरों से भाग गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में पिछले 5 सालों में अन्य जानवरों की तुलना में तेंदुओं ने लोगों पर ज्यादा हमले किए हैं और इसका प्रतिशत 60 है. यानी इंसानों पर जानवरों के हमलों में 60 फीसदी हिस्सा तेदुएं के हमलों का है.

हर साल होती है एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल तेंदुओ के हमलों की वजह से राज्य में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत होती है. तेंदुओं के हमलों में सबसे ज्यादा प्रभावित पौड़ी के पोखरा और एकेश्वर ब्लॉक हैं. बड़ी बात यह है कि तेंदुओं के हमलों के बाद पौड़ी के मंजगांव, भरतपुर और डबरा गांव पूरी तरह से खाली हो गए हैं. इस मामलों को लेकर ग्रामीणों का एक दो महीने पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास पहुंचा था. डबरा गांव छोड़कर गए भालुलगढ़ ट्रस्ट के संस्थापक सुधीर सुंदरियाल का कहना है, ”मैंने अपनी चाची को तेंदुए के हमले में खो दिया. अब हमारा पूरा परिवार डबरा से चला गया है. हम ऐसे कई परिवारों के बारे में जानते हैं जो पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर से चले गए.”

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