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स्टार्टअप में 50 फीसदी नौकरियां स्थानीय को देनी होंगी

देहरादून : केंद्र सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत उत्तराखंड में लगने वाले उद्योगों में पचास प्रतिशत रोजगार स्थानीय युवाओं को देना अनिवार्य कर दिया गया है। बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई। मौजूदा समय में राज्य और केंद्र सरकार की अलग-अलग स्टार्टअप नीति है।

राज्य और केंद्र अपनी नीति के तहत स्टार्टअप को लाभ दे रहे हैं। मगर, कई स्टार्टअप ऐसे हैं, जो केंद्र की नीति के तहत राज्य में लग रहे हैं और राज्य के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार के सामने दुविधा की स्थिति पैदा हो रही थी। राज्य की नीति के तहत आने वाले स्टार्टअप को भी इससे परेशानी हो रही थी।

इसलिए त्रिवेंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया है। बुधवार को कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि केंद्र की स्टार्टअप नीति के तहत लगने वाले उद्योगों के लिए राज्य में पंजीकरण अनिवार्य होगा। साथ ही राज्य की सभी शर्तों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि केंद्र की नीति के तहत लगने वाले उद्योगों में भी पचास फीसदी रोजगार स्थानीय युवाओं को मिलेगा। राज्य सरकार केंद्र के 100 करोड़ तक के स्टार्टअप को राज्य में पंजीकृत करेगी। लेकिन, लाभ उसे अधिकतम 25 करोड़ तक के टर्न ओवर पर ही मिलेंगे।

अपर सचिव एमएसएमई आनंद स्वरूप ने बताया कि उत्तराखंड में स्टार्टअप नीति लागू होने के बाद से 60 के करीब स्टार्टअप आ चुके हैं। नई खोज, नए आइडिया को स्टार्टअप कहा जाता है। राज्य में अभी तक सबसे अधिक स्टार्टअप हॉर्टिकल्चर और एग्रीकल्चर के क्षेत्र में आए हैं।

उत्तराखंड में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत आने वाले उद्योगों के लिए भी पचास फीसदी रोजगार स्थानीय को देना अनिवार्य कर दिया है। राज्य की नीति के तहत लगने वाले उद्योगों के लिए यह नियम पहले से ही लागू है। पूर्व में सरकार ने सिडकुल क्षेत्र में सत्तर फीसदी रोजगार स्थानीय युवाओं को देने के आदेश भी किए थे। लेकिन, स्किल्ड युवा नहीं होने की वजह से स्थानीय को बड़े
स्तर पर रोजगार देने में कठिनाई आ रही थी।

डीएमएमसी के कर्मियों का एसडीएमए में विलय : कैबिनेट ने डीएमएमसी के 29 कर्मचारियों का विलय एसडीएमए में किए जाने को मंजूरी दे दी है। इसमें तीन स्थायी कर्मचारी, चार संविदा कर्मचारी और 21 बिना पद वाले कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी कर्मचारियों का मौजूदा स्थिति में ही एसडीएमए में विलय होगा।

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