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बागेश्वर के 50 काश्तकार कीवी के व्यवसायिक उत्पादन करने में जुटे

बागेश्वर : एक जनपद एक उत्पादन (On District On Product) के क्षेत्र में बागेश्वर जिले के लिए सरकार ने कीवी फल को चुना है। पांच हेक्टेयर भूमि पर कीवी उत्पादन के लिए उद्यान विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

वर्तमान में लगभग 50 काश्तकार कीवी फल का उत्पादन कर रहे हैं। जिसमें उन्हें दो लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। जिले में 500 क्विंटल कीवी का उत्पादन हो रहा है।

भवाली से लेकर दिल्ली तक पहुंची बागेश्वर की कीवी

भवाली से लेकर दिल्ली तक जिले का कीवी पहुंचने लगा है। ग्रेडिंग के अनुसार 100 से लेकर 150 रुपये प्रतिकिलो खेत से बिक रहा है। पलायन रोको नर्सरी शामा में उद्यान विभाग ने बना दी है। राजकीय पौधालय कर्मी में भी पौधे उगाए जा रहे हैं। अब अन्य राज्यों से पौधे किसानों को नहीं खरीदने होंगे।

ओडीओपी में कीवी शामिल

सहायक उद्यान अधिकारी कुलदीप जोशी ने बताया कि जिला योजना के तहत पांच हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट ओडीओपी में कीवी शामिल है।

शामा, लीती, बड़ी-पन्याली, नौकोड़ी, कौसानी, कुमरौड़ा, अणां, छात में उत्पादन हो रहा है। प्लाटेंशन को बढ़ाने के लिए प्राइवेट नर्सरी का पंजीकरण किया गया है। पहले पौधे हिमाचल, उत्तरकाशी, नैनीताल आदि से मंगाए जाते थे। जिसमें काश्तकारों को परेशानी होती थी।

ये हैं प्रगतिशील किसान

शामा गांव के भवान सिंह कोरंगा प्रतिवर्ष 15 लाख, लीती के हरीश चंद्र सिंह और कुमरौड़ा गांव के केशर सिंह प्रतिवर्ष दो लाख रुपये तक कीवी फल से आय कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य किसान भी पचास से एक लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

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