देश/प्रदेश

उत्तरकाशी लॉकडाउन के बीच 472 सेब उत्पादकों को सरकार से अनुमति का इंतजार

उत्तरकाशी: लॉकडाउन के बीच सरकार ने कृषि व बागवानी करने वाले लोगों दवाई आदि सामान ले जाने और उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की छूटी दी है। परंतु हर्षिल घाटी के काश्तकारों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। 472 काश्तकार उत्तरकाशी, डुंडा और भटवाड़ी से हर्षिल घाटी में नहीं जा पा रहे हैं। प्रशासन ने अभी तक एक भी काश्तकारों को अनुमति नहीं दी है। जबकि इस समय सेब के बागीचों में फ्लावरिग सीजन चल रहा है तथा बागीचों में कई तरह के कीटनाशकों का छिड़काव भी होता है।

हर्षिल घाटी में धराली, मुखवा, हर्षिल, झाला, बगोरी, छोलमी, जसपुर, पुरोला, सुक्की टॉप के अधिकांश काश्तकार शीतकाल के समय उत्तरकाशी, भटवाड़ी, नेताला, गणेशपुर, मातली और डुंडा में रहते हैं। घाटी में बर्फ पिघलने के बाद वे वापस लौटते हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण काश्तकार उत्तरकाशी के आसपास ही फंसे हुए हैं। मुख्य उद्यान अधिकारी ने भी इस संबंध में जिलाधिकारी को अनुमति के लिए पत्र लिखा है। जिसमें 472 उद्यान काश्तकारों के लिए अनुमति मांगी गई है, लेकिन अभी तक एक भी काश्तकारों को हर्षिल घाटी में जाने की अनुमति नहीं दी गई है। उद्यानपति महेश पंवार, सतीश सेमवाल, राजेश आदि ने कहा कि इन दिनों बागीचों में कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। इस समय मजदूर भी उपलब्ध नहीं हैं। इस लिए खुद ही काश्तकारों को यह काम करना पड़ेगा।

इस संबंध में उन्होंने मुख्य सचिव से दिशा निर्देश मांगे हैं। क्या, एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए इतने लोगों को कृषि बागवानी के लिए अनुमति दी जा सकती हैं। शुक्रवार तक शासन से इस संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं मिले थे। दिशा-निर्देश मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

-डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी

विशेष