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388 वन्यजीव अपराध के मामले दर्ज हुए बीते साल

नई दिल्ली,  वर्ष 2018 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत वन्यजीव संबंधी अपराधों के 388 मामले दर्ज किए गए। यह जानकारी बीते दिनों पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए एक जवाब से सामने आई है।

388 में 123 मामले यानी दर्ज किए गए प्रत्येक तीन में से एक मामला तेंदुए या बाघ से संबंधित था। इनमें 81 मामले यानी प्रत्येक पांच में से एक मामला तेंदुए से संबंधित तो 42 मामले बाघ से संबंधित थे। इन सबके बीच प्रवासी पक्षियों से संबंधित 61 मामले दर्ज किए गए।

388 में से 259 मामले यानी हर तीन में से दो मामले केवल पांच प्रजातियों से ही संबंधित थे। इसमें तेंदुए (21 प्रतिशत), संरक्षित पक्षी (16 प्रतिशत), बाघ (11 प्रतिशत) के साथ तारा कछुआ या समुद्री कछुए (10 प्रतिशत) और हिरण (नौ प्रतिशत) थे।

अगर बड़े स्तर पर बात की जाए तो 90 फीसद मामले 10 प्रजातियों के वन्य जीवों से ही जुड़े हैं। हाथी से जुड़े मामले सात प्रतिशत, सांप से जुड़े पांच प्रतिशत, गैंडे के चार प्रतिशत, नेवले के चार प्रतिशत और पैंगोलिन के चार प्रतिशत से थोड़ा कम मामले सामने आए हैं।

शेष दस प्रतिशत मामले दस अन्य प्रजातियों से संबंधित हैं, जिनमें टोके गेको (छिपकली की एक प्रजाति) और बंदर शामिल थे। कुल मिलाकर देखा जाए तो 2016 के बाद से वन्यजीव अपराध के मामलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन 2017 की तुलना में 2018 में थोड़े मामले बढ़ गए। 2016 में 565 मामले पंजीकृत किए गए थे और 2017 में 342 केस दर्ज किए गए थे।

मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जानवरों के अवैध व्यापार और शिकार के बारे में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की स्थापना की गई है। केंद्र संचालित योजनाओं जैसे, ‘प्रोजेक्ट टाइगर’, ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट ‘वन्यजीव के आवासों का विकास’ तहत राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र की ओर से धनराशि प्रदान की जाती है।

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