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राष्ट्र के लिए उत्तराखंड के 255 जवानों ने किए प्राण न्यौछावर

टिहरी: विजय दिवस का आयोजन नई टिहरी स्थित युद्ध स्मारक में सुबह 11 बजे से किया गया. इस अवसर पर डीएम वी. षणमुगम ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान कार्यक्रम में जिले के विभिन्न संगठनों ने प्रतिभाग किया. 1971 की लड़ाई लड़ने वाले पूर्व सैनिक ने युद्ध की कहानी बताई. आईये जानते हैं वीर गाथा से भरी ये रोचक कहानी.

1971 का युद्ध लड़ने वाले पूर्व सैनिक इंद्र सिंह नेगी ने बताया कि ये दिन पाकिस्तान पर भारत की जीत के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष मनाया जाता है. उन्होंने बताया कि भारत ने 13 दिनों के युद्ध के बाद 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की थी. इस युद्ध में टिहरी के 12 जवान एवं उत्तराखंड राज्य के 255 जवान इस युद्ध में शहीद हुए थे.

इंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस युद्ध में पराजय के बाद, पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी ने अपने लगभग एक लाख सैनिकों के साथ भारतीय सेना और बांग्लादेश मुक्तिवाहिनी के समक्ष समर्पण कर दिया था. इस युद्ध के हीरो मानिक शाह थे. इस युद्ध के बाद पाकिस्तान दो भागों में विभक्त होकर बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) के रूप में स्वतंत्र देश बन गया.

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