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उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन में 100 करोड़ के पावर गेम घोटाले की शुरुआत

सूत्रों की अगर यहाँ यह भी माने तो इस प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं पर एक बार फिर ऐसा ग्रहण लगने वाला है जिसकी मार आने वाली पीढि़यों के उपभोक्ता भी बिजली दरों की असहनीय मार के रूप में झेलेंगे। वैसे तो पहले भी उक्त महादंश को उजागर किया जा चुका है कि यूपीसीएल एमडी एक और ऐसा पाॅवर परचेज अनुबंध (पीपीए) बिना जरूरत और उपयोगिता के श्रावन्ती व गामा गैस बेस्ड जनरेटरों से आगामी 25 वर्षों का बाजार से कहीं अधिक दरों पर क्रय किये जाने की साजिश है। उक्त पीपीए साईन किये जाने के पीछे करोंडों के बारे न्यारे करने और कराने का खेल भी मुख्य रूप से माना जा रहा है।

जबकि इसके विपरीत एक अन्य फर्म मेसर्स आर वी इन्फ्रा. के द्वारा श्रावंती व गामा से कहीं अधिक सस्ती दरों पर पाँच वर्षों तक 500 मेगावाॅट बिजली बेचने का प्रस्ताव भी सीएम को दिया जा चुका परंतु यह काॅकस अपनी जेबें भरने के स्वार्थ में श्रावंती और गामा से ही पीपीए की फिराक में हैं। यही नहीं खुले बाजार में बिजली 2 से 3 रुपये की दरों पर आसानी से उपलब्ध है तो ऐसे में नियमित निरंतरता के साथ तीन चार गुनी दरों पर बिजली की खरीद का अनुबंध क्यों?

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