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शिक्षा को सुधारने के लिए कई अहम संकल्प लिए

देहरादून,उत्तराखंड राज्य ने स्थापना के 20वें वर्ष में दाखिल होने से पहले भावी कर्णधारों की शिक्षा को सुधारने के लिए कई अहम संकल्प लिए हैं।

वर्ष 2021 तक प्रत्येक सरकारी विद्यालय भवन और फर्नीचर के मामले में आत्मनिर्भर होगा। वहीं 500 सरकारी इंटर कॉलेजों में आगामी जनवरी माह से स्मार्ट क्लासेज शुरू होंगी।

इसी तरह उच्च शिक्षा में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के लिए लाए जा रहे अलग-अलग अंब्रेला एक्ट जल्द मूर्त रूप लेंगे।

प्रदेश के सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पर्याप्त कक्षाकक्षों और फर्नीचर की कमी की समस्या बनी हुई है। सरकार ने अगले दो वर्षों के भीतर इस समस्या का समाधान करने का संकल्प लिया है।

भवनों और संसाधनों के मामले में सरकार का ये इरादा सिर्फ विद्यालयी शिक्षा तक सीमित नहीं है। उच्च शिक्षा में भी भवन विहीन सरकारी डिग्री कॉलेजों को भवन और जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। राज्य स्थापना के 19 साल पूरे होने और 20वें वर्ष में दाखिल होने के मौके पर सरकार दो दर्जन सरकारी डिग्री कॉलेजों को भवन बनाने के लिए धनराशि दे चुकी है।

दस साल से ज्यादा वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार प्रदेश के 500 सरकारी इंटर कॉलेजों में स्मार्ट क्लासेज का सपना साकार होने जा रहा है।

इसी शैक्षिक सत्र में आगामी जनवरी माह से इसे प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए चार स्टूडियो और वर्चुअल लैब ङ्क्षहदू नेशनल इंटर कॉलेज में स्थापित की जाएंगी।

स्टूडियो में 45-45 मिनट की कक्षाएं चलेंगी। इन कक्षाओं को संचालित करने के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। जिन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी हैं, वहां प्रोजेक्टर के माध्यम से स्मार्ट क्लासेज चलाई जाएंगी।

स्मार्ट क्लास चलाने के लिए टीसीएल कंपनी के साथ करार हो चुका है। इस कार्य के लिए कंपनी को 92 करोड़ दिए जा रहे हैं। जिन विद्यालयों में शिक्षक मौजूद नहीं हैं, वहां स्मार्ट क्लासेज बड़े मददगार साबित होंगे।

स्मार्ट क्लासेज में एक पीरियड 45 मिनट का होगा। इन क्लासेज के लिए आइटी में दक्ष शिक्षकों की मदद ली जाएगी। इन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि ये मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य शिक्षकों को ट्रेनिंग दे सकें।

प्रदेश के सरकारी व सहायताप्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ रहे 6.84 लाख बच्चों को इसी माह नवंबर से हफ्ते में एक बार मिड डे मील के साथ मीठा सुगंधित दूध पीने को मिलेगा।

कक्षा एक से पांचवीं तक बच्चों को 100 मिलीलीटर और छठी से आठवीं कक्षा तक 150 मिलीलीटर दूध बच्चों को दिया जाएगा। राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के बाद इस संबंध में शासनादेश जारी किया जा चुका है।

मीठे सुगंधित दूध के रूप में कक्षा एक से पांचवीं तक प्राथमिक कक्षा के प्रत्येक बच्चे को 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन मिलेगा। वहीं उच्च प्राथमिक कक्षाओं में प्रत्येक बच्चे को 700 कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन मिलेगा।

इस वर्ष से अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को जहां जिला स्तर पर पुरस्कृत करने की परंपरा आगे बढ़ाई गई, वहीं शैलेश मटियानी पुरस्कारों के लिए शिक्षकों को इंतजार करना पड़ा।

लंबे इंतजार के बाद बीते माह अक्टूबर में 24 शिक्षकों को शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया। हालांकि प्रदेश में 29 शिक्षकों को यह पुरस्कार देने का प्रावधान है, लेकिन महकमे को पूरे शिक्षक पुरस्कार के लिए नहीं मिले। पुरस्कार के लिए शिक्षकों के चयन के नए मानक भी सरकार ने बनाए हैं।

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने पीएचडी में धांधली और वित्तीय अनियमितताओं के लिए दोषियों पर कार्रवाई नहीं करने के मामले में सरकार और राजभवन के निशाने पर है।

विश्वविद्यालय रिमाइंडर भेजने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में कतरा रहा है। विश्वविद्यालय में पीएचडी मामले में धांधली के साथ स्पेशल ऑडिट में पकड़े गए घोटाले को लेकर सरकार ने बेहद कड़े तेवर अपनाए थे।

ऑडिट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के तीन संघटक कॉलेजों में 13.61 करोड़ के उपकरणों की खरीद में गड़बड़ी पकड़ी गई।

आखिरकार श्रीनगर में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) को लेकर असमंजस दूर हो गया। बीते माह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धन सिंह रावत की मौजूदगी में राज्य के एकमात्र एनआइटी के भवन का शिलान्यास किया गया। एनआइटी को लेकर विवाद गहराने से इसके राज्य से छिने जाने का खतरा उत्पन्न हो गया था।

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