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विधायकों ने नहीं दिया संपत्ति का ब्योरा

देहरादून,  भले ही आज पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा हो, मगर राज्य विधानसभा के सदस्य इसमें रुचि नहीं ले रहे। विधायकों के अपनी संपत्ति का ब्योरा देने के मामले की तस्वीर तो यही बयां कर रही है। मौजूदा विधानसभा ढाई साल से अधिक का कार्यकाल पूरा करने जा रही है, लेकिन अभी तक एक मनोनीत विधायक समेत कुल 71 विधायकों में से 47 ने अपनी संपत्ति का ब्योरा विधानसभा सचिवालय को नहीं दिया है। इनमें मुख्यमंत्री, दो कैबिनेट व एक राज्यमंत्री के साथ ही नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं।

उप्र की भांति उत्तराखंड में भी विधानसभा सदस्यों को अपनी संपत्ति का ब्योरा विधानसभा सचिवालय को देना होता है। प्रति वर्ष इसे अपडेट कर विस सचिवालय गजट नोटिफिकेशन करता है। उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश मंत्री तथा विधायक (आस्तियों तथा दायित्वों का प्रकाशन) अधिनियम 1975 की धारा 3(2) एवं धारा 4 में निर्धारित समय के भीतर विधायकों से प्राप्त संपत्ति के विवरण को विधानसभा सचिवालय द्वारा सार्वजनिक किया जाता है। हालांकि, यह बाध्यकारी नहीं, बल्कि स्वैच्छिक है, मगर स्वस्थ संसदीय परंपराओं और पारदर्शिता के लिहाज से अहम है।

बावजूद इसके मौजूदा विधानसभा के सदस्य इसमें रुचि नहीं ले रहे। विधानसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक 71 में से सिर्फ 24 विधायकों ने ही विधानसभा सचिवालय में निर्वाचित होने के बाद एक बार अपनी संपत्ति की जानकारी दी है। इनमें 23 विधायक भाजपा के एक और निर्दलीय हैं। (इनमें कैबिनेट मंत्री रहे स्व. प्रकाश पंत भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा विधानसभा सचिवालय को दे दिया था) शेष 47 विधायकों ने संपत्ति का ब्योरा देने में अभी तक रुचि नहीं दिखाई है।

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