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रेरा की बड़ी कार्रवाई, बिल्डर पर लगाया एक करोड़ का जुर्माना

देहरादून: उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बिना पंजीकरण के फ्लैट बेचने के मामले पर बड़ी कार्रवाई की है. प्राधिकरण ने हेक्टर रियलिटी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बिल्डर के नाम पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही जुर्माने की राशि डेढ़ महीने के भीतर अदा न करने पर रेरा अथॉरिटी बिल्डर के खिलाफ आरसी कार्रवाई के रूप में जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की बात कही है.

उत्तराखंड में लगातार एक के बाद एक रियल स्टेट बिल्डरों पर फ्लैट, अपार्टमेंट, मकान खरीद फरोख्त मामले में अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया है. वहीं, अभी भी रेरा प्राधिकरण के शिकंजे से कई डिफॉल्टर बिल्डर्स बचे हुए हैं. वहीं, रेरा प्राधिकरण ने आरोपित बिल्डर कंपनी पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही कंपनी पर एक ग्राहक से 29 लाख रुपये वसूलने के बावजूद फ्लैट का तय समय पर कब्जा ना देने के चलते भी रेरा ने शिकंजा कसा है.

जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश निवासी पुष्पा गुप्ता ने फरवरी 2017 में फ्लैट खरीदने के लिए हेक्टर रियलिटी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर को हरिद्वार मारवेला सिटी प्रोजेक्ट के रूप में 29 लाख रुपये बुकिंग के तौर पर जमा किए थे. लेकिन, आरोपित बिल्डर द्वारा तय समय पर फ्लैट में कब्जा ना देने के चलते रहना प्राधिकरण ने आदेश जारी करने के अगले 45 दिनों के अंदर बिल्डर को 29 लाख रुपए की धनराशि में 10 से 15 प्रतिशत ब्याज के साथ ग्राहक को वापस देने का आदेश भी दिया है.

बता दें कि उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी रेरा में लगभग 216 रियल स्टेट प्रोजेक्ट ऑनलाइन रजिस्टर्ड हैं, जबकि ऑफलाइन मात्र 62 प्रोजेक्ट पंजीकृत बताए जा रहे हैं. इसके अलावा रजिस्टर्ड एजेंट की संख्या ऑफलाइन 175 है, जबकि ऑनलाइन 118 हैं.

जानकारी के अनुसार, देहरादून, हरिद्वार, रुड़की और उधम सिंह नगर जैसे कई मैदानी जिलों में संचालित होने वाले कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट रेरा प्राधिकरण की आंखों में धूल झोंक कर घर खरीदने का सपना देखने वाले ग्राहकों के साथ लंबे समय से फर्जीवाड़ा कर रहे हैं. हरिद्वार जिले में सबसे ज्यादा डिफाल्टर बिल्डर्स फ्लैट अपार्टमेंट खरीदने वाले लोगों की गाढ़ी कमाई पर कब्जा किए हुए हैं. उधर, सैकड़ों पीड़ित लोगों की शिकायतों के बावजूद रेरा प्राधिकरण में पहले दिन से ही मैन पावर की कमी के चलते धोखाधड़ी करने वाले बिल्डरों पर नकेल कसने में काफी हद तक नाकाम रहा है.

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