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भारत-नेपाल सीमा से सटे बड़ालू गांव में लीची बिखेरेगी लालिमा

पिथौरागढ़: भारत-नेपाल सीमा से सटे बड़ालू क्षेत्र को अब लीची जोन के रू प में विकसित किया जाएगा। इसके लिए उद्यान विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। ग्रामीणों को लीची पौध वितरित करने के बाद विभाग ने अब कीटनाशक भी उपलब्ध कराने शुरू कर दिए हैं।

 

बड़ालू में बीस वर्ष पूर्व तक लीची का अच्छा उत्पादन होता था। इसे देखते हुए विभाग ने यहां अपना फार्म भी बनाया था। फार्म के जरिये किसानों को तकनीकी मदद दी जाती थी। वर्ष 2004 के बाद यहां लीची उत्पादन का दायरा कम होने लगा।

विभाग ने अब नए सिरे से लीची उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके लिए बड़ालू क्षेत्र को कलस्टर का दर्जा दिया गया है। उद्यान विभाग ने बड़ालू गांव के लोगों को पहले चरण में लीची के पौध वितरित किए।

पौध वितरण के बाद दूसरे चरण में चयनित ग्रामीणों को कीटनाशक छिड़काव पंप और बीस बर्मी बैड भी उपलब्ध कराए हैं। बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता दिवाकर जोशी ने इनका वितरण शुरू कर दिया। विभाग की मंशा बड़ालू क्षेत्र को लीची के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है।

बड़ालू लीची जोन में 20 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लीची का उत्पादन होगा। इस क्षेत्र में चार से लेकर आधा दर्जन तक गांव शामिल हो सकते हैं। लीची उत्पादकों को उद्यान विभाग पूरी तकनीकी सहायता देने के साथ ही प्रशिक्षण भी देगा।

समय-समय पर उत्पादकों को देश के अग्रणी लीची उत्पादक राज्यों का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे उत्पादन का व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकें। इस वर्ष लगाई गई लीची की पौध चौथे वर्ष यानी 2024 में उत्पादन देने लगेगी। भविष्य में लीची जोन का दायरा भी उद्यान विभाग बढ़ाएगा।

बड़ालू क्षेत्र में लीची उत्पादन की अच्छी संभवनाएं हैं। यहां की जलवायु का आंकलन करने के बाद विभाग ने पौध वितरण के साथ छिड़काव पंप और बर्मी बैड वितरित किए जा रहे हैं। अगले कुछ वर्षो में यहां लीची का उत्पादन होने लगेगा। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों की आमदनी में बढ़ेगी।

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