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बर्फ से घिरा खाती गांव सुविधाओं से दूर

बागेश्वर : कपकोट तहसील स्थित जिले का अंतिम गांव खाती आज भी मूलभूत सुविधाओं से जुझ रहा है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल पिडारी ग्लेशियर, सुंदरढूंगा घाटी को इसी गांव से रास्ता जाने के चलते यहां हर साल हजारों की संख्या में सैलानी आते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर गांव पर्यटकों की पहली पसंद भी है, इसके बावजूद यहां सड़क, संचार, बिजली आदि प्रमुख जन सुविधाएं नहीं हैं।

 

सरकार एक ओर गांव के अंतिम छोर में बसे व्यक्ति के विकास के दावे करती है। वहीं हकीकत यह है कि पूरा गांव ही मूलभूत समस्याओं से दशकों से जूझ रहा है।

ग्रामीण प्रकाश सिंह दानू, राजेंद्र सिंह दानू, राहुल टाकुली, खुशाल सिंह, भगवत सिंह, आनंद सिंह, लछम सिंह, चांदनी दानू आदि ने बताया कि गांव में सड़क, बिजली, संचार प्रमुख समस्या है।

अगर जन सुविधाओं का विस्तार हो जाए तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। संचार व्यवस्था बिना यह दुनिया से अलग-थलग पड़ा है। इस संबंध में जल्द कार्रवाई न हुई तो फिर मुख्यालय में आकर आंदोलन ही एकमात्र विकल्प बचेगा।

टेंडर हुए, शुरू नहीं हुआ सड़क का काम

खर्किया से खाती तक मोटर मार्ग स्वीकृत हो गया है। टेंडर भी हो गए हैं, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो रहा है। आज भी ग्रामीण दुर्गम क्षेत्र में छह किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं।

गांव में बिजली तक नहीं

खाती गांव में बिजली तक नहीं है। 2017-18 में गांव को बिजली व्यवस्था से जोड़ा गया था, लेकिन केवल एक माह तक ही आपूíत सुचारू रही। तब से कई बार ग्रामीण ऊर्जा निगम से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन परिणाम शून्य हैं।

 

मुख्यालय से 70 किमी दूर, 24 किमी सड़क जर्जर

जिला मुख्यालय से कपकोट-भराड़ी-कर्मी-विनायक टाप से खर्किया तक 64 गाड़ी में जाया जा सकता है। हालांकि इसमें 24 किमी का सफर बेहद कष्टदायी है, क्योंकि डामर बिना मार्ग बेहद जर्जर है। खर्किया से आगे छह किमी तक दुर्गम रास्तों से होकर गांव तक पैदल पहुंचना पड़ता है।

गांव से 15 किमी दूर पिंडारी ग्लेशियर खाती से पिंडारी ग्लेशियर की दूरी सिर्फ 15 किमी है। प्रतिवर्ष हजारों की तादात में देसी-विदेशी सैलानी यहां पहुंचते हैं। बीते वर्ष पहुंचे 27858 देसी-विदेशी सैलानियों को सुविधाओं के अभाव में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था।

ग्राम पंचायत आबादी क्षेत्रफल

खाती 314 524.602 वर्जन

-संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देशित कर दिया है। जितनी जल्दी संभव होगा, ग्रामीणों की समस्या का समाधान किया जाएगा।

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