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न गांव में जल स्रोत और न ही पेयजल योजना

पिथौरागढ़ : जिला मुख्यालय से लगभग 16 किमी की दूर सौड़लेख पहाड़ी में स्थित सौड़लेख गांव में गर्मियों में ग्रामीण संग्रहित बरसाती जल पीने को मजबूर हैं। 45 परिवारों वाले इस गांव में आज तक पेयजल योजना का निर्माण नहीं हो सका है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस गांव में एक भी पेयजल स्रोत नहीं है।

 

समुद्र तल से लगभग 6000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सौड़लेख गांव के ऊंचाई पर बसे होने से यहां पर एक भी पेयजल स्रोत नहीं है। शीतकाल में बीते दिनों इस गांव में जबरदस्त हिमपात भी हुआ था। अमूमन प्रतिवर्ष शीतकाल में यहां तक हल्की बर्फबारी हो जाती है।

चारों तरफ बांज, बुरांश व उतीस आदि जल संवर्धन वाले वृक्षों के बाद भी इस गांव में पेयजल स्रोत नहीं है। जिसका कारण गांव के पहाड़ की चोटी पर स्थित होना माना जाता है।

जबकि इस गांव के आसपास के क्षेत्र में जल के स्रोत हैं। जिन स्रोतों से कई गांवों को पानी जाता है। दुर्भाग्य यह है कि सौड़लेख से नीचे स्थित स्रोतों से गांव तक पानी नहीं पहुंचा है।ग्रामीणों के पेयजल के लिए जल संस्थान द्वारा यहां पर एक हैंडपंप लगाया गया है।

मानसून काल से लेकर शीतकाल तक कभी कभार पंप से पानी आता है, परंतु गर्मियों में हैंडपंप भी जबाव दे देता है। जिसे देखते हुए ग्रामीणों ने बरसाती जल का संग्रह किया है। गांव के मध्य बरसाती जल संग्रह टैंक से भी गांव के 45 परिवारों को पानी मिलता है।

ग्रामीण बताते हैं कि बरसाती जल से ही उनकी और उनके जानवरों की प्यास बुझती है। विभाग और सरकार से मांग करने के बाद भी आश्वासन मिलते हैं, परंतु पेयजल योजना नहीं मिलती है। पूरा गांव अनुसूचित जाति गांव है।

पीएम की हर घर नल योजना के तहत चयनित हुआ गांव केंद्र सरकार की हर घर को पानी देने की योजना के तहत सौड़लेख गांव के लिए पेयजल योजना पहली बार स्वीकृत हुई है। एक साल बीतने के बाद भी पेयजल योजना का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। जिसे लेकर ग्रामीण परेशान हैं।

सौड़लेख गांव को आजादी के बाद आज तक पेयजल योजना नहीं मिलना ग्रामीणों के साथ अन्याय है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन तक को जानकारी है। ग्रामीण परेशान रहते हैं, सरकार को शीघ्र गांव को पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास करने चाहिए।

 

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