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नैनीताल में नाले में मिली नवजात

नैनीताल: नैनीताल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। मल्लीताल सात नंबर क्षेत्र के नाले में नवजात बच्ची पड़ी हुई मिली। राहगीरों ने नवजात को बीडी पांडे अस्पताल भर्ती कराया। जहां दोपहर तक अस्पताल स्टाफ द्वारा देखरेख करने और उपचार देने के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

वहीं डीएम सविन बंसल ने भी मामले का संज्ञान लिया है, जिसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी ब्यौमा जैन ने अस्पताल जाकर बच्ची का हालचाल जाना, फिर विमर्श संस्था के संरक्षण में बच्ची को एसटीएच भेज दिया गया। उन्‍होंने घोषणा की है इसके बारे में सूचना देने पर 10 हजार का नकद इनाम दिया जाएगा। सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

सुबह करीब सात बजे मल्लीताल स्टाफ हाउस, निकट हनुमान मंदिर के समीप से जा रहे राशिद अली, शांति देवी और रमेश चंद को नाली में नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। नाले में झांक कर देखा तो नवजात बिना नाल कटे अवस्था में पड़ा हुआ है।

उसे तत्काल बीडी पांडे महिला अस्पताल पहुंचाया गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव खर्कवाल ने बताया कि अधिक ठंड में होने के कारण नवजात को हाईपोथर्मिया की शिकायत हो गई है।

बच्ची की सांसे भी रुक-रुककर चल रही थी। इसके अलावा शरीर में खरोंच के निशान भी हैं। करीब चार घंटे तक उपचार और देखरेख के बाद अब स्थिति में सुधार है, लेकिन खतरा टला नहीं है। जिस कारण उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।

 

कलियुगी मां को कोसा, दो लोग देवदूत बनकर पहुंचे

 

सात नंबर क्षेत्र में नवजात बच्ची मिलने से एक बार फिर मानवता शर्मसार हो गई। माना जा रहा है कि लोकलाज के भय से किसी कुंवारी मां ने उसे फेंक दिया। नाले में बच्ची के मिलने की घटना जिसने भी सुनी, उसने कलियुगी मां को खूब कोसा। बच्ची के लिए एक महिला, एक मुस्लिम युवक व अन्य देवदूत बनकर पहुंचे।

 

चाइल्ड हेल्पलाइन करेगी देखरेख

 

नवजात के मिलने की सूचना पर डीएम सविन बंसल ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को अस्पताल भेजा। विमर्श संस्था की समन्वयक गायत्री दर्मवाल अन्य सदस्य भी पहुंचे। उन्होंने बच्ची का हालचाल जाना।

जिला प्रोबेशन अधिकारी ने कहा कि बच्ची की हालत में सुधार आने के बाद संबंधित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि सुशीला तिवारी में उपचार के बाद उसे अल्मोड़ा शिशु गृह में रखा जाएगा।

नवजात बच्ची को नियमानुसार गोद दे दिया जाएगा। यदि इस बच्ची को अडोप्ट करने के लिए कोई दंपती सामने नहीं आता है तो इस बच्ची की परवरिश, भरण-पोषण, शिक्षा तथा विवाह तक का सारा खर्चा जिला प्रशासन वहन करेगा।

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