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नेपाल सीमा पर बीएसएनएल धड़ाम

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जौलजीवी : नेपाल सीमा पर बीएसएनएल की लचर संचार सेवा का लाभ नेपाल की संचार कंपनियां उठा रही हैं। भारत में आए दिन संचार सेवा बाधित रहने से भारतीय नागरिक नेपाल की सिम से अपने आवश्यक फोन करने को मजबूर हैं।

जिसके चलते प्रतिमाह लाखों का राजस्व नेपाल की संचार कंपनियों को मिल रहा है। बतादें कि अव्यवस्थित दूरसंचार सेवा के कारण करीब चार दर्जन गांवों के पांच हजार उपभोक्ता सीधे तौर पर प्रभावित है। जबकि इन गांवों की कुल आबादी पचास हजार के करीब है।

 

आश्चर्य यह है कि अपने देश में लगे बीएसएनएल के टॉवरों से आसपास के गांवों तक सिग्नल नहीं दे पाते हैं। वहीं काली नदी पार नेपाल में लगे टॉवरों के सिग्नल भारत में 36 किमी दूर तक आते हैं।

कालापानी से लेकर पंचेश्वर तक जिले की लगभग दो सौ किमी लंबी सीमा नेपाल से लगती है। नेपाल में पंचेश्वर से लेकर उच्च हिमालयी कालापानी तक संचार सेवा विगत कई वर्षाें से संचालित है। भारत में पंचेश्वर से लेकर धारचूला तक बीएसएनएल की ही सेवा है। उच्च हिमालय अभी संचार सुविधा से वंचित है।

आज तक कभी भी लगातार तीस दिन नेपाल सीमा पर संचार सेवा जारी नहीं रही है। माह में दो, तीन बार सेवा बाधित होती है। कभी कभार तो पूरा माह संचार विहीन हो जाता है। टॉवरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

संचार के नाम पर नेपाल सीमा पर रहने वाली जनता के साथ मजाक किया जा रहा है। संचार ठप हो जाता है शिकायत सुनने वाला तक कोई नहीं है। ऐसे में उपभोक्ता परेशान रहते हैं। उनकी बात सुनी तक नहीं जाती है।

नेता केवल झूठे आश्वासन देते हैं। वर्षों से टॉवर लगाने की बात की जाती है न तो टॉवर लगते हैं और नहीं टावरों की क्षमता बढ़ाई जाती है। सबकुछ ऑनलाइन किया जा चुका है। ऑनलाइन के लिए सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

संचार क्रांति के दौर में भी इंटरनेट सेवा बदहाल है। प्रमाण पत्र बनाने, बैंकों, डाकघरों में अपना धन जमा करने और निकालने के लिए कई दिन चक्कर काटने पड़ते हैं।

भारत सरकार को नेपाल से सबक सीखना चाहिए। सीमा पर दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति एक जैसी है। नेपाल में एक सरकारी एजेंसी सहित दो अन्य निजी संचार कंपनियां सेवा दे रही हैं। भारत में मात्र बीएसएनएल ही है।

नेपाल और चीन सीमा पर टॉवर प्रस्तावित हैं। जिसमें कुछ का बीएसएनएल द्वारा टॉवर के लिए सर्वे भी किया जा चुका है। निजी संचार कंपनियों से भी वार्ता की गई है। नेपाल सीमा से लगे क्षेत्र में संचार सेवा को दुरु स्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्ड फुंकने में नया कार्ड अल्मोड़ा से मंगाया जाता है। अल्मोड़ा से कार्ड आने के बाद बदला जाता है। जिसमें समय लग जाता है। वहीं मार्ग चौड़ीकरण कार्य के दौरान ओएफसी लाइन कट जाती है। जिस कारण संचार सेवा में बाधा आती है।

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