उत्तरकाशी

दो पुलिस कार्मिकों को जीवन रक्षक पदक

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उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के दो जांबाजों के अदम्य साहस को जीवन रक्षक पदक का सम्मान मिला। गृह मंत्रालय की सिफारिशों पर राष्ट्रपति ने मुहर लगाई है।

जीवन रक्षक पदक घोषित होने के से दोनों जांबाज खुश हैं, हालांकि अभी इनकी साहस की कहानी आनी बाकी है।

यह जांबाज हैं विनोद थपलियाल, जो वर्तमान में धरासू थानाध्यक्ष हैं। दूसरे ममलेश रावत जो वर्तमान में पुरोला थाने में कांस्टेबल (चालक) के पद पर तैनात हैं। इन्हें जीवन रक्षक पदक जिले के दो वरिष्ठ अधिकारियों के जीवन को बचाने के लिए दिया गया है।

इन दोनों जांबाजों ने अपना जीवन संकट में डालकर दो अधिकारियों की जीवन रक्षा की नजीर पेश की। उन अधिकारियों को अपना आजीवन ऋणी बनाया।

दरअसल इन दोनों जांबाजों के पराक्रम की यह घटना 17 जुलाई 2018 की शाम की है। यमुनोत्री से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ददनपाल वापस लौट रहे थे।

यमुनोत्री हाईवे पर 700 मीटर लंबे डाबरकोट भूस्खलन जोन को पार करना आसान नहीं था। पहाड़ी से पत्थरों की बरसात हो रही थी। ऐसे में तत्कालीन बड़कोट थाने के एसओ विनोद थपलियाल और कांस्टेबल (चालक) ममलेश रावत ने अपनी गाड़ी आगे बढ़ाई, तो इतने में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बडकोट थाने की उसी गाड़ी से भूस्खलन जोन पार करने की ठानी।

भूस्खलन जोन के बीच गाड़ी पहुंची ही थी कि पत्थरों की बरसात तेज हो गई। गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई तो एसपी ददन पाल घायल हुए।

दोनों जांबाजों ने क्षतिग्रस्त गाड़ी के अंदर से डीएम और एसपी को किसी तरह बाहर निकाला। पत्थरों के लगातार बरसने के बावजूद पैदल ही दोनों अधिकारियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। ये घटना आज भी रोंगटे खड़े करती है।