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देहरादून में हट गए हाकिम, नहीं हट पाया अतिक्रमण

देहरादून,हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर भी देहरादून में अतिक्रमण के न हट पाने की एक बड़ी वजह यहां पिछले सात महीने में दो मर्तबा ‘हाकिम’ का तबादला भी रहा।

जून-2018 में दिए हाईकोर्ट के आदेश पर शहर में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के विरुद्ध हुई कार्रवाई की कमान संभालने वाले जिलाधिकारी एस ए. मुरुगेशन का तबादला जून-2019 में हो गया। उनके बाद दून में आए जिलाधिकारी सी. रविशंकर का तबादला सात माह में ही कर दिया गया।

 

हैरानी वाली बात ये है कि सी. रविशंकर का तबादला उस दौरान हुआ जब पंद्रह दिन पहले ही उन्होंने अतिक्रमण पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। 15 जनवरी को ही सी. रविशंकर ने अतिक्रमण पर फिर से अभियान चलाने का फरमान दिया और 31 जनवरी को उनका तबादला हरिद्वार कर दिया गया।

इसे महज संयोग कहें या कुछ और, पर अतिक्रमण का जस का तस खड़े रहना सवाल जरूर उठा रहा। अब हाईकोर्ट ने सरकार से फिर जवाब मांगा है तो शासन से लेकर प्रशासन तक में खलबली मची हुई है कि क्या जवाब तलाशा जाए। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए 18 जून 2018 को दून अतिक्रमण हटाने पर कड़े आदेश जारी किए थे।

इसमें सड़कों, नाली, फुटपॉथ, सरकारी जमीनों व कॉलोनी आदि हिस्सों से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के आदेश पर 27 जून से प्रशासन ने शहर को चार जोन में बांटकर चिह्निकरण शुरू किया।

शुरुआत में हाईकोर्ट के डर से शासन व प्रशासन के अधिकारियों ने दिलचस्पी दिखा अभियान को गंभीरता से संचालित किया। मगर, इस बीच वर्षा, विधानसभा सत्र, इन्वेस्टर्स मीट आदि का आयोजन होने पर पुलिस फोर्स की कमी बता अफसरों ने अभियान से मुंह मुड़ना शुरू कर दिया।

प्रेमनगर में अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई हुई तो अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले भी परेशान दिखे। मगर, प्रेमनगर की कार्रवाई के बाद प्रशासन ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली। इसके बाद जिलाधिकारी तो दूर कोई पटवारी तक शहर की सड़क पर अतिक्रमण देखने नहीं गया।

अतिक्रमण पर लगाए गए लाल निशान को लोगों ने मिटा दिए। जहां अतिक्रमण हटाया गया था, उन स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण हो गया। इसका उदाहरण प्रेमनगर बाजार है। जहां दोबारा अतिक्रमण का बाजार सज गया है।

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