Home गढ़वाल देव डोलियों गंगा में लगाई डुबकी

देव डोलियों गंगा में लगाई डुबकी

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उत्तरकाशी : मकर संक्रांति पर 50 से अधिक देव डोलियों के साथ पांच हजार श्रद्धालुओं ने भागीरथी (गंगा) में आस्था की डुबकी लगाई। तड़के तीन बजे से शुरू हुए गंगा स्नान का दौरा दिन भर चलता रहा। गोमुख ग्लेशियर से निकलने वाली भागीरथी का हाड़ कंपा देने वाला बर्फीला पानी भी श्रद्धालुओं के उत्साह को ठंडा नहीं कर पाया। देव डोलियों के साथ बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं आस्था की डुबकी लगाने में पीछे नहीं रहे।

उत्तरकाशी में पौराणिक माघ मेले में मकर संक्रांति के गंगा स्नान का खास महत्व है। इसी कारण बीते मंगलवार शाम को यमुना घाटी, टौंस घाटी के साथ टिहरी व आस पास के क्षेत्रों से ग्रामीण अपने देव डोलियों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे। बुधवार सुबह तीन बजे से उत्तरकाशी के मणिकर्णिका घाट, जड़भरत घाट, शंकर मठ घाट, गंगोरी, लक्षेश्वर सहित आदि घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

कड़ाके की ठंड के साथ ग्लेशियर से आ रहे गंगा के पानी में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। गंगा किनारे हवन व पूजा करने के बाद गंगा आरती की गई। गंगा स्नान करने वाली कंडार देवता की डोली, हरिमहाराज के ढोल व खंडद्वारी देवी की डोल, राजराजेश्वरी देवी चिन्यालीसौड़, भद्रकाली देवी, सुरकंडा देवी, भोले नाथ, नागणी माता, नागराज देवता, सिद्धेश्वर देवता आदि देव डोलियां थी। डोलियों के साथ ग्रामीणों का भी बड़ा हुजूम उमड़ा। ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश चंद्र शास्त्री भट्ट ने बताया कि उत्तरायण में हिन्दू धर्म में सभी त्योहार, मांगलिक कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं। सूर्य छह माह तक दक्षिणायन होता है तथा छह माह उत्तराणायन होता है।

नई टिहरी: बुधवार को मकर संक्रांति पर्व पर देवप्रयाग संगम स्थल पर तीन बजे से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया था। भगवान महादेव, मां भगवती ,घंटाकर्ण आदि की डोलियां निशान,ध्वज सहित पहुंचे और तड़के ही स्नान किया। इस दौरान आसपास के क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे। देवप्रयाग में भगवान श्री रघुनाथ मंदिर में इस अवसर पर विशेष श्रृंगार कर पूजा अर्चना की गई।

मकर-संक्रांति के अवसर पर कर्णप्रयाग नगर में अलकनंदा व पिंडर संगम में दूर-दराज गांव से आए लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर शिवालय, उमा देवी मंदिर व राम मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं मुख्य बाजार में इस मौके पर एक दिवसीय मकरेण मेले में लगी दुकानों पर ग्रामीणों ने जमकर खरीदारी की। इसी तरह चंडिका मंदिर सिमली के कपाट पखवाड़ेभर के लिए पौराणिक परंपरा के अनुसार बंद कर दिए गए। मंदिर के पुजारी प्रदीप गैरोला ने बताया कि माघ माह के प्रथम पखवाडे़ में सिद्धपीठ चंडिका देवी मंदिर के कपाट एक माह के लिए बंद होने का विधान है और अब 30 जनवरी को विधिवत पूजा उपरांत कपाट खुलेंगे।

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