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देवस्थानम एक्ट को लेकर दुविधा में मंदिर समिति और प्रशासन

रुद्रप्रयाग, चारधाम के लिए भले ही देवस्थानम एक्ट अस्तित्व में आ गया हो, लेकिन इसका अभी तक धरातल पर क्रियान्वयन नहीं हो पाया। इससे श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के साथ ही प्रशासन भी असमंजस में है। मंदिर समिति यह भी तय नहीं कर पा रही कि महाशिवरात्रि पर्व पर 21 फरवरी को केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि किसके दिशा-निर्देशन में तय की जाए।

देवस्थानम एक्ट के तहत चारों धाम के लिए अभी तक न तो अधिकारियों की नियुक्ति हुई है, न मंदिर समिति के कर्मचारियों को इसमें समायोजित करने संबंधी कार्रवाई ही। इससे केदारनाथ यात्रा तैयारियों को लेकर मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।

आगामी 21 फरवरी को केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि घोषित होनी है। इसके लिए मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी के दिशा-निर्देशन में पंचांग गणना की जाती है, लेकिन असमंजस के चलते अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कौन अधिकारी इस महत्वपूर्ण मौके पर मौजूद रहेगा।

केदारनाथ यात्रा के लिए फरवरी में ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस बार धाम और पैदल मार्ग पर बर्फ बहुत अधिक है, सो तैयारियां भी युद्धस्तर पर करनी होंगी, लेकिन एक्ट के अस्तित्व में आने के बाद अभी तक प्रशासन को यह भी जानकारी नहीं कि इसमें उसकी क्या भूमिका होगी। एक्ट इसी सीजन में लागू हो पाएगा या नहीं इसे लेकर भी संशय है, जबकि यात्रा शुरू होने में अब सवा दो महीने का समय ही बचा है।

मंदिर समिति के कार्याधिकारी एमपी जमलोकी बताते हैं कि अभी तक मुख्य कार्याधिकारी के दिशा-निर्देशन में ही यात्रा तैयारियों को लेकर केदारनाथ टीम भेजी जाती थी। लेकिन, असमंजस के कारण इस बार टीम भेजने के बारे में भी कोई फैसला नहीं हो पाया है।

उधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि देवस्थानम एक्ट का अध्ययन किया जा रहा है। यात्रा को लेकर जो भी निर्देश शासन स्तर से जारी होंगे, उन्हीं के अनुरूप यात्रा तैयारियां की जाएंगी।

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