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जिन दो जगहों पर हुई पीएम नरेंद्र मोदी की सभा, वहीं भाजपा को मिल पाई सीटें

पूर्वी दिल्ली,दिल्ली के विधानसभा चुनाव में एक बात ये भी देखने को मिली कि जिन दो जगहों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा की थी उन्हीं दोनों इलाकों में भाजपा कुछ सीटें जीतने में कामयाब रही बाकी किसी लोकसभा इलाके में पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई।

 

पूरी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की आंधी के बीच भी यमुनापार ने भाजपा को जीवित रखा है। यहां उत्तरपूर्वी और पूर्वी संसदीय क्षेत्र की कुल 16 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 6 सीटें भाजपा के खाते में आती दिख रही है।

इनमें सांसद गौतम गंभीर के संसदीय क्षेत्र की तीन सीटें लक्ष्मीनगर, गांधीनगर और विश्वास नगर शामिल हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र की भी तीन सीटें घोंडा, रोहतास नगर और करावल नगर शामिल हैं।

लक्ष्मी नगर से भाजपा के अभय वर्मा, गांधीनगर से अनिल वाजपेयी, विश्वास नगर से ओम प्रकाश शर्मा की जीत हुई है। विश्वास नगर में पिछली बार भी भाजपा ही जीती थी। वहीं रोहतास नगर से भाजपा के जितेंद्र महाजन ने आप की विधायक सरिता सिंह को शिकस्त दी। घोंडा में भाजपा प्रत्याशी अजय महावर और करावल नगर से मोहन सिंह बिष्ट जीत के लगभग करीब हैं। मोहन सिंह बिष्ट पुराने भाजपा नेता है और वो पहले भी चुनाव जीत चुके हैं। इलाके में उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा वो जनता के बीच भी बने रहते हैं।

 

दरअसल यमुनापार की दोनों लोकसभा सीटों पर यूपी और बिहार के वोटरों की संख्या अधिक है। इस वजह से ये माना जा रहा था कि मनोज तिवारी को पसंद करने वाले उन्हीं की पार्टी को वोट देंगे, यहां आम आदमी का अधिक जोर नहीं चलेगा। साल 2015 के चुनाव में जब आम आदमी पार्टी को 67 सीटें मिली थी, उस समय भी यहां से भाजपा की सीट मिली थी जबकि बाकी दिल्ली में उनको एक भी सीट नहीं मिल पाई थी। इस बार के चुनाव में भी भाजपा को यहां से अधिक सीटें मिली हैं। इससे ये कहा जा सकता है कि यहां पर भाजपा के वोटरों में किसी तरह से सेंध नहीं लग पाई है।

 

एक बड़ा कारण यहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा को भी दिया जा रहा है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सिर्फ दो जगहों पर सभा की जिसमें एक शाहदरा और दूसरी रोहिणी में की गई। उनकी सभा का दोनों जगहों पर थोड़ा बहुत असर दिखा। इन दोनों ही जगहों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। बाकी किसी लोकसभा के इलाके में भाजपा प्रत्याशी के लिए जीत पाना मुश्किल हो गया।

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