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जापान के जायका प्रोजेक्ट के 5 अरब की मदद से बढ़ेगा पहाड़ी फलों का उत्पादन

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में औद्योनिकी की हालत को बेहतर कर किसानों की माली हालत में सुधार करने की योजना है। इसके लिए जापान इंटरनेशनल को-आपरेशन एजेंसी (जायका) आर्थिक सहयोग देगी। औद्योनिकी सुधार नाम से संचालित होने वाली इस परियोजना के मई माह में शुरू हो जाने की उम्मीद है। औद्योनिकी उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों की पहचान रही है।

पिछले कुछ दशकों में पहाड़ी फलों के उत्पाद की पहचान धीरे-धीरे सिकुड़ रही है। इसके पीछे पलायन, खेती की तकनीकि में पिछड़ापन व जंगली जानवरों के खतरे हैं। इस पहचान को समृद्ध करने के लिए उत्तराखंड ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव को अब जापान की मदद से धरातल पर उतारा जाएगा। पहले चरण में गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी और चमोली तथा कुमाऊं मंडल के नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपद को परियोजना में शामिल किया गया है।

परियोजना के लिए करीब 500 करोड़ का सहयोग जापान से मिलेगा। परियोजना में परंपरागत नींबू, माल्टा, संतरा, आडू, पलम, खुबानी, आम, लीची, पपीता, मशरूम और शहद उत्पादन  के साथ ही औद्योनिकी के क्षेत्र में कीवी, किन्नू के उत्पादन को बढ़ावा दिए जाने के नए प्रयास होंगे।

परियोजना जापान के उद्यान विशेषज्ञों की मौजूदगी में ही धरातल पर उतारी जाएगी। केंद्र की हरी झंडी मिलने के बाद अब उत्तराखंड में परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मई माह से यह परियोजना शुरू होगी।

जायका (JICA) परियोजना में किसी भी किसान को व्यक्तिगत रूप से कोई मदद नहीं मिलेगी। परियोजना के तहत चयनित जिलों में एक विशेष उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर बनाए जायेंगे। इन क्लस्टरों में रहने वाले किसानों के समूह बनेंगे। समूह के जरिए ही उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

जिला उद्यान अधिकारी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जायका परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। परियोजना में पिथौरागढ़ जनपद भी शामिल है। मई माह से परियोजना के तहत कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

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