बागेश्वर

जंगलों को आग से बचाने के लिए होंगे सामूहिक उपाय

बागेश्वर: जिला कार्यालय सभागार में बृहस्पतिवार को हुई वन अग्नि सुरक्षा संबंधी बैठक में जंगल की आग को रोकने के लिए सामूहिक उपाय करने का निर्णय लिया गया।

इस मौके पर अधिकारियों जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्राम पंचायतों और वन पंचायतों में जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम रंजना राजगुरु ने कहा कि 15 फरवरी से 15 जून तक का समय अतिसंवेदनशील होता है।

इस दौरान वनों में अत्यधिक आग लगती है। वनों में आग से बचाने के लिए ग्राम पंचायतों एवं वन पंचायतों में जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

बैठक में ग्राम पंचायतों में राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम प्रहरी, ग्राम प्रधान, अध्यक्ष महिला मंगल दल, युवक मंगल दल के प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बनाने को कहा गया। डीएम ने लोनिवि, पीएमजीएसवाई, एनएच के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपनी सड़कों की सफाई करा लें।

इस मौके पर एसपी रचिता जुयाल, एडीएम राहुल कुमार गोयल, एसडीएम बागेश्वर राकेश चंद्र तिवारी, कपकोट प्रमोद कुमार, गरुड़ जयवर्धन शर्मा, कांडा योगेंद्र सिंह, आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल, अग्निशमन अधिकारी महेश चंद्र, सरपंच संघ के अध्यक्ष पूरन सिंह रावल, किशन सिंह दानू आदि मौजूद थे।

छह रेंजों में बनाए 30 क्रू स्टेशनडीएफओ मयंक शेखर झा ने स्लाइड शो के माध्यम से वनाग्नि को रोकने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले की छह रेंजों में 30 क्रू-स्टेशन बनाए गए हैं। इसके अंतर्गत बागेश्वर रेंज में छह , गढ़खेत रैंज में छह, कपकोट रैंज में चार, धरमघर रेंज में छह, बैजनाथ रेंज में छह, ग्लेशियर रेंज में दो क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। जिले में स्थापित आपदा कंट्रोल रूम समेत सभी तहसील,थाना/चौकी, वन विभाग के कार्यालय में भी वन अग्नि की सूचना दी जा सकती है। ब्यूरो

वित्त सचिव की सलाह लेकर खला कार्यालय सभागार में डीएफओ, एसडीओ की बैठक में पंचायती वनों के विकास एवं अनुरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम संबंधित अधिकारियों को वन पंचायतों की वन निधि का प्रबंधन-आय का संवर्द्धन, निधि से पंचायती वनों के विकास एवं अनुरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने कार्यवाही समय रहते करने के निर्देश दिए। कहा वन पंचायत निधि के तहत काफी लंबे समय से लंबित राशि को व्यय करने के लिए संबंधित पटल सहायक व वित्त सचिव से मार्गदर्शन लेने को कहा गया, ताकि लंबित राशि का उपयोग वन पंचायतों के चुनाव एवं वन पंचायतों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के सम्मान में खर्च की जा सके।