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छात्र संख्या घटने से प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के वजूद पर संकट

नैनीताल: सरकारी शिक्षा की बदहाली और शासकीय-अशासकीय विद्यालयों को लेकर अभिभावकों का आकर्षण कम होने से शहर की दो प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाएं उत्तराखंड बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षा सेंटर की सूची से भी बाहर हो गई हैं।

बोर्ड ने दोनों कॉलेजों को इंटर बोर्ड जीव विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा शहीद सैनिक स्कूल में आयोजित कराने तथा परीक्षार्थियों को नियत तिथि पर भेजने का पत्र भेजा है।

दरअसल सीआरएसटी कॉलेज ब्रिटिशराज से ही प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान रहा है। आजादी के बाद सीआरएसटी को इंटर का दर्जा मिल गया जबकि जीआइसी 70 के दशक में बना। जीआइसी में 90 के दशक तक छात्र संख्या डेढ़ हजार के आसपास थी जबकि सीआरएसटी में तो प्रवेश के लिए मारामारी रहती थी। इत्तेफाक से दोनों कॉलेजों में इस बार इंटर बोर्ड जीव विज्ञान में सिर्फ छह-छह विद्यार्थी ही अध्ययनरत हैं।

मानकों से कम विद्यार्थी होने की वजह से विद्यालयी शिक्षा बोर्ड ने प्रयोगात्मक परीक्षा सेंटर समाप्त करते हुए दोनों कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को जीव विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए बच्चों को शहीद सैनिक स्कूल भेजने को कहा है। यहां बता दें कि कभी शहीद सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों का बोर्ड परीक्षा सेंटर सीआरएसटी कॉलेज होता था।

जीआइसी नैनीताल हो या सीआरएसटी। दोनों शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर प्रतिभाओं ने देश-दुनियां में नाम कमाया। दिग्गज नेता एनडी तिवारी, ओलंपियन सैय्यद अली, सिने अभिनेता निर्मल पांडे, पूर्व मुख्य सचिव व राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष इंदु कुमार पांडे, पूर्व विधायक एनएस जंतवाल व खड़क सिंह बोरा सीआरएसटी के छात्र रहे जबकि जीआइसी में पूर्व नौ सेना अध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी, पूर्व आइएएस तारकेंद्र वैष्णव, प्रसिद्ध साहित्यकार हिमांशु जोशी, एनडी तिवारी की धर्मपत्नी सुशीला तिवारी ने अध्ययन किया।

जीआइसी नैनीताल में कक्षा-11 पीसीएम ग्रुप में मात्र एक छात्र अध्ययनरत है। कॉलेज में भौतिकी, रसायन, हिदी, अंग्रेजी के दो-दो लेक्चरर समेत कुल 25 शिक्षक कार्यरत हैं, जो मानकों से अधिक हैं। ऐसे में अगले साल जीआइसी से बोर्ड परीक्षा सेंटर भी हटना तय है।

सीआरएसटी में एकबार बोर्ड परीक्षा सेंटर हट चुका है। रेगुलर व प्राइवेट छात्रों की बदौलत फिर से बोर्ड का सेंटर बन सका है। सीआरएसटी के प्रबंधक अनूप साह का कहना है कि छात्र संख्या बढ़ाने के लिए विद्यालय प्रबंधन व शिक्षक लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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